प्रवासी मजदूरों में स्किल एवं अनस्किल मजदूरों की अलग-अलग सूची तैयार कर फीडिंग का काम चल रहा है। अब तक 50 हजार मजदूरों का नाम फीड हो चुका है। इनमें करीब 18672 अनस्किल और 37000 स्किल मजदूर हैं। मजदूरों के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम भी तैयार किए जा रहे हैं। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन का कहना है कि जिले में दो से तीन लाख प्रवासी मजदूर दूसरे प्रांतों से लौटे हैं।
डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि दूसरे प्रांतों से लौटे प्रवासी कामगारों का डाटा बेस तैयार कर उन्हें रोजगार देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक लोकल अर्बन एप भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें शहर आकर काम करने वाले तमाम ट्रेड के श्रमिकों का नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज रहेगा।
किसी को भी जरूरत पड़ने पर इस एप के माध्यम से प्लंबर, कारपेंटर, टॉयल्स लगाने वाले, दिहाड़ी मजदूरों को काम पर बुला सकेगा। सरकारी परियोजनाओं के निर्माण में भी एप से मदद मिलेगा। वहीं प्रवासी कामगारों, श्रमिकों को रोजगार मिलने में आसानी होगी।