खयाल गायकी के शीर्षस्थ गायक पंडित जसराज के संगीत समारोह, 'पंडित मोतीराम पंडित मणिराम संगीत' समारोह के आज 50 वर्ष पूरे हो गए। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में दिवंगत गायक की स्मृति में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया है। साथ ही अमित शाह ने पंडित जसराज के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन भी किया है।
स्मारक डाक टिकट, डाक विभाग, संचार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी किया गया है। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने पंडित जसराज को याद करते हुए कहा कि उन्होंने आठ दशक से अधिक समय तक वैष्णव परंपरा के भक्ति पद, पुष्टिमार्गीय संगीत और भारतीय शास्त्रीय संगीत को पूरी दुनिया के संगीत प्रेमियों तक पहुंचाया, और इसे अमर बना दिया। अमित शाह ने जोड़ा कि पंडित जी अष्टसखा भजन भक्ति भाव से परिपूर्ण होकर गाते थे, जिसे सुनकर श्रोताओं के सामने भगवान कृष्ण की छवि बन जाती थी।
गृह मंत्री ने आगे जोड़ा कि पंडित जसराज ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और भक्ति पद को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, और यही कारण है कि उन्हें देश समेत दुनियाभर के लोग बेशुमार प्यार करते हैं। शास्त्रीय संगीत को घर-घर तक पहुंचाने वाले शास्त्रीय गायक पंडित जसराज का 90 वर्ष की उम्र में अमेरिका में निधन हो गया। पंडित जसराज भले ही आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज और उपस्थिति हमेशा जीवित रहेगी।
पंडित जसराज न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर हैं, उन्होंने पुणे में सवाई गंधर्व उत्सव में भी प्रदर्शन किया था। पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय संगीत के मेवाती परिवार के गायक थे। भारत की केंद्र सरकार ने संगीत के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें वर्ष 2000 में पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया था। शास्त्रीय गायक पंडित जसराज ने अनोखी प्रस्तुति दी थी, उन्होंने अंटार्कटिका के दक्षिणी ध्रुव पर शास्त्रीय गायक के रूप में प्रस्तुति दी थी। इसके साथ ही वह सातों महाद्वीपों में कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले पहले भारतीय थे।