अपने समय में पूरी दुनिया पर असर छोड़ने वाले आध्यात्मिक गुरु ओशो विवादित व्यक्ति के रूप में याद किए जाते हैं। हिंदी में बायोपिक सिनेमा का दौर रफ्तार पकड़ रहा है और ओशो का जीवन रुपहले पर्दे पर आने को तैयार है। उनकी जीवनगाथा पर दो खंडों में फिल्म बन रही है। पहला हिस्सा रिलीज के लिए तैयार है। यह जानने वाली बात होगी कि क्या इस फिल्म ओशो की मौत का खुलासा होगा?
रिबेलियस फ्लावर। बायोपिक सिनेमा के दौर में यह फिल्म धीरे-धीरे अपनी खुशबू बिखेर रही है और जैसे-जैसे लोगों को इसका पता चल रहा है वे इसके बारे में जानने को उत्सुक हो रहे हैं। यह बायोपिक है हमारे समय के सबसे क्रांतिकारी और विवादित आध्यात्मिक गुरु आचार्य/भगवान रजनीश उर्फ ओशो की। इस फिल्म का भारत से ज्यादा विदेश में इंतजार हो रहा है।
ओशो ने कहा था कि अगर कभी मेरी जिंदगी पर फिल्म बने तो उसमें जीवन के घटनाक्रमों का हिस्सा केवल 30 फीसदी हो और मेरा संदेश 70 फीसदी। मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले और जबलपुर (मध्य प्रदेश) में पले-पढ़े-बढ़े निर्देशक कृष्ण हूडा ने रिबेलियस फ्लावर बनाते हुए इस बात को बखूबी ध्यान रखा है।
फिल्म का निर्माण ओशो की संगति करने वाले जगदीश भारती ने किया है। वह इसके लेखक और निर्माता हैं। उन्होंने ओशो की आत्मकथा कॉल ऑफ द ओशन को आधार बना कर स्क्रिप्ट लिखी है।
15 जनवरी को रिलीज के लिए तैयार है फिल्म
तीन वर्षों की मेहनत से यह फिल्म बन सकी है और अब 15 जनवरी को रिलीज के लिए तैयार है। जबकि 19 जनवरी को ओशो को पृथ्वी से विदा हुए 26 बरस पूरे हो जाएंगे। कृष्ण कहते हैं, ‘रिबेलियस फ्लावर मूल रूप से जगदीश भारती का सपना है।’ फिल्म ओशो की बाल्यावस्था से लेकर बुद्धत्व को प्राप्त होने तक की कहानी है। जो उनकी जिंदगी के 1938 से 1952 तक के कालखंड को समेटती है।
कृष्ण के अनुसार, ‘ओशो के जीवन की कथा विराट सागर की तरह है और उसे कुछ घंटों में समेट पाना संभव नहीं है, इसलिए हमने उनकी बायोपिक दो खंडों में बनाने का फैसला किया है।’ फिल्म के दूसरे हिस्से को भारती लिख रहे हैं और इसकी शूटिंग 2016 में ही शुरू करने की योजना है। उम्मीद है फिल्म के इस हिस्से में ओशो की मौत से पर्दा उठेगा। उनकी मौत को लेकर कई तरह की बातें की जाती रही हैं। इसमें एक नाम अमेरिका का भी आता है। उल्लेखनीय है कि ओशो को अमेरिका से देश निकाला दिया गया था।
रिबेलियस फ्लावर को शूट करते समय निर्माता-निर्देशक ने ओशो के जीवन से जुड़ी जगहों को ही कैमरे में कैद किया है। कृष्ण बताते हैं, ‘हमने कुचवाड़ा (मध्यप्रदेश) में वहां शूटिंग की जहां ओशो का जन्म हुआ था और तब वह चंद्रमोहन जैन थे। फिल्म गाडरवारा में भी शूट की गई है जहां वह अपने माता-पिता के साथ रहते थे।’
कौन अभिनेता बना है ओशो
वास्तव में ओशो ने अपने बचपन का लंबा समय नाना-नानी के साथ गुजारा था और यह फिल्म के केंद्रीय कथानक में खूब ढंग से उभारा गया है। वह उनकी नानी ही थीं, जिन्होंने अपने नाती की आध्यात्मिक जिज्ञासाओं को हवा दी और जब रजनीश ने बुद्धत्व प्राप्त किया तो सबसे पहले उनसे दीक्षा ली।
फिल्म में ओशो के दो रूप हैं। उनके बचपन की भूमिका प्रिंस शाह ने निभाई है और युवावस्था शशांक शेखर ने। ओशो को आध्यात्मिक राह पर आगे बढ़ाने में तीन गुरुओं (मग्गा बाबा, मस्तो बाबा, पागल बाबा) का हाथ रहा है।
यह तीनों भूमिकाएं टीवी शो होस्ट और अभिनेता मंत्रा ने निभाई हैं। कृष्ण बताते हैं, ‘जब भारती ने मुझसे कहा कि सत्य के चेहरे भले ही अलग-अलग हों उसकी खुशबू एक ही होती है, तब मैंने तय किया कि ओशो के गुरुओं की भूमिका एक ही ऐक्टर करेगा।’
सीक्वल के लिए जरूरी बड़ा बजट
रिबेलियस फ्लॉवर के सीमित बजट में बनने के बाद निर्माताओं के सामने इसका सीक्वल बनाने की कड़ी चुनौती है। बायोपिक का प्रीक्वल जहां मध्यप्रदेश के गांवों और छोटे शहरों में आसानी से कम बजट में बन गया, वहीं बुद्धत्व के बाद ओशो की कहानी मुंबई होती हुई अमेरिका तक जाती है।
इसके साथ ही ओशो का जीवन क्रमशः भव्य होता चला गया था। उनका कम्यून और हजारों हजार शिष्य थे। उनके पास हीरे जड़ित घड़ियां और 91 रॉल्स रॉयस कारें थीं। इस भव्यता का इंतजाम करते हुए अमेरिका में शूटिंग करना आसान नहीं होगा। मगर कृष्ण हूडा का कहना है कि तैयारियां चल रही हैं और शूटिंग भी समय से शुरू हो जाएगी।
विदेशों में फिल्म का खास इंतजार
पूना स्थित ओशो कम्यून और दुनिया भर में ओशो के चाहने वालों/संन्यासियों की भारी संख्या के बावजूद प्रोड्यूसर जगदीश भारती ने फिल्म को अपने धन से सीमित बजट में बनाया है। वह नहीं चाहते थे कि फिल्म में अन्य निर्माता भी हो और रचनात्मक दखल दे। फिल्म का शो पूना कम्यून में हो चुका है और इसे वहां पसंद किया गया है।
देश भर में रिलीज होने जा रही रिबेलियस फ्लावर को निर्माता-निर्देशक उन शहरों में खास तौर पर प्रमोट कर रहे हैं जहां ओशो के अनुयायी अधिक हैं। विदेश में फिल्म भारत में रिलीज होने के बाद लगाई जाएगी। हालांकि कुछ विदेशी फिल्म महोत्सवों में इसे दिखाया गया है और वहां सराहना मिली है। पिछले साल इटली के ट्राइकेस स्थित सेलेंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इसे स्पेशल मेंशन जूरी अवार्ड भी मिला था।