उपायुक्त डॉ. राजेंद्र केवी ने कहा कि यूनिवर्सिटी द्वारा शांति भंग करने वाले कपड़े जैसे हिजाब या भगवा स्कार्फ पहनकर नहीं आने के फैसले के चलते कॉलेज अधिकारियों ने छात्राओं को प्रवेश देने से इनकार कर दिया। हाल ही में हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि हिजाब आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है और कॉलेज में ड्रेस कोड का पालन होना चाहिए।
डॉ. राजेंद्र ने कहा कि यूनिवर्सिटी के आदेश से परेशान कुछ छात्राएं उनके पास आई थीं। उन्हें बताया कि वह जिलास्तर पर यूनिवर्सिटी सदस्यों के फैसले को चुनौती नहीं दे सकते हैं और वे यूनिवर्सिटी का आदेश मानने को बाध्य हैं। उन्होंने उनसे कानूनी पहलुओं पर विचार करने को कहा। साथ ही उन्हें कॉलेज कैंपस में शांति बनाए रखने को कहा है।
वहीं छात्राओं का कहना है कि यह आदेश प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों के लिए है न कि डिग्री कॉलेजों के लिए। एक छात्रा ने कहा कि हमने ड्रेस कोड की समीक्षा के लिए उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा है और उनसे मामले के समाधान की अपील की है।
यह मसला डेढ़ हफ्ते से चल रहा है लेकिन इसने कोई पब्लिसिटी हासिल नहीं की क्योंकि हम इस मामले को कानूनी तौर पर हल करना चाहते हैं लेकिन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कारण इसे पब्लिसिटी मिल गई है। छात्रों के एक समूह में व्हाट्सएप चैट का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्रों ने हिंदुओं को 24 मई को भगवा शॉल पहनकर कॉलेज आने को कहा था।
सरकार व कोर्ट का आदेश यूनिवर्सिटी मानने को बाध्य
यूनिवर्सिटी हाईकोर्ट और प्रदेश सरकार के आदेश को मानने के लिए बाध्य है। यदि किसी छात्र को इसके पालन करने में दिक्कत है तो वह इसके समाधान के लिए पूरी गंभीरता से कोशिश करेंगे। - पी. सुब्रह्मण्यम यदपादिथाया, वाइस चांसलर, मंगलूरू यूनिवर्सिटी