ज्ञानपुर।विश्व विख्यात कालीन नगरी कुपोषण के डंक से जूझ रही है। सरकारी योजनाओं के बाद भी कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। सरकार की कुपोषण खत्म करने की मुहिम जमीन पर खास असर नहीं दिखा रही है। स्थिति यह है कि जिले में 22 हजार कुपोषित और 1850 से अधिक अति कुपोषित बच्चे हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में संतुलित भोजन न मिलने से कम उम्र के बच्चे और गर्भवती महिलाओं के नवजात बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। जिससे उनके शरीर का विकास अन्य बच्चों की अपेक्षा विकसित नहीं हो पाता। कुपोषण को खत्म करने के लिए सरकार बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से पोषाहार समेत अन्य पौष्टिक आहार की व्यवस्था करा रही है। व्यवस्था प्रभावी न होने पर एक साल पूर्व राज्य पोषण मिशन और हौसला पोषण योजना लागू की गई। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़ो पर नजर डाली जाए तो गत छह महीने में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या में खास कमी नहीं आई। 50 से 100 बच्चे सामान्य हुए तो उतने नए बच्चे सूची में शामिल हो गए। जुलाई में अति कुपोषित बच्चे जहां 1910 रहे तो अगस्त में 1850 तक ही पहुंचा जबकि कुपोषित बच्चों की संख्या 22 हजार 500 से 22 हजार 155 आ सका। डॉ. अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान खान-पान में लापरवाही से बच्चों के कुपोषित होने का खतरा बढ़ जाता है। सीडीओ रमेश चंद्र पांडेय सरकार की कल्याणकारी राज्य पोषण और हौसला पोषण मिशन के माध्यम से कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने का प्रयास किया जा रहा है।