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विश्व जल दिवस : दिल्ली में भूजल की स्थिति खराब, पानी का अपना मूल स्रोत भी नहीं, दूसरे राज्यों पर है निर्भरता 

Tue, 22 Mar 2022 01:49 AM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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विश्व जल दिवस - फोटो : अमर उजाला
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विश्व जल दिवस आज है। थीम है इसकी, 'भूजल: अदृश्य को दृश्यमान बनाना' धरती के अंदर समाया पानी, जो इस वक्त चुकता जा रहा है, उसको दुबारा से वापस लाना, इस बार के जल दिवस का मकसद है। दिल्ली की हालत इस मामले में बेहतर नहीं है। केंद्रीय भूजल आयोग की रिपोर्ट बताती है कि राजधानी में भूजल हर साल औसतन 200 मीटर तक नीचे जा रहा है। अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट भूजल समेत दिल्ली को उपलब्ध पानी की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से रोशनी डालती है। साथ ही इसमें उनकी भी चर्चा है, जो पानी बचाने की मुहिम से जुड़े हैं।
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भूजल स्तर में गिरावट, 200 मीटर की गिरावट
दिल्ली में भूजल स्तर में लगातार गिरावट हो रही है। हर दिन भूजलस्तर 0.05 सेंटीमीटर नीचे जा रहा है। केंद्रीय भूजल आयोग (सीजीडब्ल्यूबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के भूजल स्तर पर सालाना 200 मीटर की गिरावट हो रही है। करीब 80 फीसदी जल स्रोत नाजुक हालत में हैं। अगर इससे अधिक दोहन किया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं। साल 2004 से 2020 के दौरान ऐसे गंभीर क्षेत्रों की संख्या 550 से बढ़कर 1057 तक पहुंच गई है। इस दौरान सुरक्षित जलस्त्रोत में महज 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरफ रिपोर्ट बताती है कि साल 2020 में दिल्ली के 11 जिलों में 34 जगहों के सैंपल की जब जांच हुई तो उसमें 50 फीसदी यानी 17 यूनिट अति शोषित हैं। राज्य के 1487.61 वर्ग किमी पुनर्भरण योग्य क्षेत्र में से 769.58 वर्ग किमी यानि 51 फीसदी क्षेत्रों में जल का अधिक दोहन किया गया। 147.16 वर्ग किमी (9.89%) ही सुरक्षित माना गया।

कुएं में भी पानी की किल्लत
मई 2019 के नवीनतम केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में 73 कुओं की जांच में केवल छह ऐसे मिले जिनका जमीनी स्तर (एमबीजीएल) से 40 मीटर से अधिक गहरी है। 13 ऐसे कुओं की गहराई 20 से 40 एमबीजीएल के बीच थी। सबसे गहरा बिंदु दक्षिण जिले में 62.6 एमबीजीएल था, जबकि दक्षिण पश्चिम दिल्ली में यह महज 1.1 एमबीजीएल था। उत्तरी जिले में जल स्तर दो से 10 एमबीजीएल के बीच था।
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जिलेवार भूजल निकासी की स्थिति 40 मीटर से अधिक की गहराई 
जिला 2004 2009 2017
मध्य 88 109 80.84
पश्चिमी 112 157 90.03
दक्षिण पश्चिम 214 138 209.25
दक्षिण 243 201 254.87
उत्तर पूर्वी 129 114 117.66
उत्तर पश्चिम 136 112
पूर्वी दिल्ली 130 186 108.45
उत्तरी 74 84
दक्षिण पूर्वी  209.54
नई दिल्ली 159.42
शाहदरा 166.99
(सभी आंकड़े फीसदी में हैं)

दिल्ली में पानी के मांग-पूर्ति में असंतुलन 
दिल्ली में मौजूदा समय में करीब 986 एमजीडी पानी की आपूर्ति की जा रही है। जबकि गर्मियों में मांग 1150 एमजीडी के करीब रहती है। मार्च 2021 की तुलना में यह करीब 66 एमजीडी अधिक है। दिल्ली सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने पर जोर दे रही है। दिल्ली सरकार की योजना है कि अप्रैल 2022 तक दिल्ली में पानी की आपूर्ति बढ़ाकर करीब 1020 एमजीडी तक की जाए। जबकि 1110 एमजीडी तक करना है।

जल शोधन करने की संचय की स्थिति
संयंत्र क्षमता पानी का स्रोत
हैदरपुर 235 पश्चिमी यमुना नहर
सोनिया विहार 145 गंग नहर
वजीराबाद 125 यमुना नदी
भगीरथी 100 गंग नहर
चंद्रावल 100 यमुना नदी
द्वारका 50 पश्चिमी यमुना नहर
नांगलाई 45 पश्चिमी यमुना नहर
ओखला 20 यमुना नदी
बवाना 20 पश्चिमी यमुना नहर

वेस्ट पानी को साफ करने का ब्यौरा
संयंत्र क्षमता
हैदरपुर 16
वजीराबाद 11
भगीरथी 10
चंद्रावल 08
नोट: आंकड़े एमजीडी में हैं। इसके अलावा दिल्ली में रैनीवेल और ट्यूबेवलों से 90 एमसीडी पानी निकलता है।

केस स्टडी : पहले चार फुट का गड्ढा खोदते थे तो आ जाता पानी
यमुना किनारे बसा जामिया नगर इलाका कभी पिकनिक स्पॉट हुआ करता था। एक समय था जब लोग ओखला हैड पर अपने पूरे परिवार के साथ पहुंचते थे। यहां की हरियाली और पानी से लबरेज यमुना नदी को निहारा जाता था। लेकिन वक्त के साथ सब कुछ खत्म सा हो गया। तेजी से बढ़ी आबादी की वजह से न सिर्फ यहां की हरियाली खत्म हुई बल्कि भूजल स्तर भी कम होता चला गया। यमुना किनारे बसी इन कालोनियों का पहले यह हाल था कि बस चार फुट का गड्ढा खोदों तो पानी निकल आता था। आज हालात एकदम उलट हो गए हैं, अंधाधुन हुए भूजल दोहन की वजह से इन कालोनियों का पानी ही सूखता जा रहा है। आज भूजल स्तर 70 से 100 फुट तक नीचे चला गया है। गर्मियों में तो यहां के हालात और भी खराब हो जाते हैं। अबुल फजल, शाहीन बाग और आसपास की कई कालोनियों तो यहां लगे नलकूपों पर ही निर्भर हैं। लगातार गिर रहे भूजल स्तर पर कुछ बुजुर्ग बेहद चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कुछ उपाय नहीं किए गए तो यहां का पानी समाप्त ही हो जाएगा।

जामिया नगर की अबुल फजल एंक्लेव में रहने वाले इख्तियार अहमद (80) बताते हैं कि वह वर्ष 1984 में इलाके में आए थे। उसे समय यहां गिनती के मकान बने थे। चारों ओर हरियाली और पानी ही पानी था। बुनियाद खोदते थे तो नींव में पानी भर जाता था। कच्चे रास्ते होने की वजह से बरसात में कई-कई दिन पानी सूखता ही नहीं था। लेकिन समय बदला और एरिया की आबादी तेजी से बढ़ी। चंद हजार की आबादी देखते ही देखते लाखों में पहुंच गई। ऊंची-ऊंची इमारतें बनी और जमीन से बेहताशा जल दोहन हुआ। साल दर साल पानी का स्तर नीचे ही गिरता चला गया। हालात यह हुए कुछ एरिया में तो पानी एकदम सूख ही गया। 

मजबूरन जिन जगहों पर पानी मौजूद था। वहां बड़ी सरकारी बोरिंग करने के बाद पाइप लाइन से पानी लोगों के घरों तक पहुंचाया गया। जब भी इन बड़ी बोरिंग (नलकूपों) में कोई दिक्कत होती है तो लोग पानी के लिए तरस जाते हैं। ओखला इलाके में सामाजिक कार्य में जुटे मसूद आलम बताते हैं कि विधानसभा की कुल आबादी 19 लाख के करीब है। यहां लगभग 17 लाख की आबादी पानी की समस्या से जूझ रही है। सरकार को यहां पर वर्षा जल संचयन के बारे में सोचना चाहिए। यदि इसके बारे में नहीं सोचा गया तो आने वाला समय बहुत दिक्कत भरा होने वाला है।

केस स्टडी: पानी बचाने को बनाया मकसद
ज्योति शर्मा वसंत कुंज में रहती हैं। आम लोगों की मदद से दो तलाबों को संरक्षित किया है। वहीं, रजोकरी में जलाशयों को बचाने के साथ साथ नम भूमि भी विकसित की है। वसंत कुंज में नीला हौज को दिल्ली विकास प्राधिकरण के सहयोग से विकसित किया। अब यह बायोडायवर्सिटी जोन का रूप लेने लगा है। जेएनयू रोड पर नीला हौज के विकसित करने के लिए सबसे पहले तलाबों की गहराई बढ़ाई गई। आसपास इकट्ठा होने वाले पानी को जलाशयों में पहुंचाया गया ताकि तालाबों को पुनर्जीवित किया जा सके। अब यह जीव जंतुओं के साथ साथ पक्षियों ने भी बसेरा बनाया। 

एनजीओ फोर्स की प्रेजीडेंट ज्योति शर्मा ने बताया कि तीनों तालाबों को स्थानीय लोगों के सहयोग से विकसित किया है। किशनगढ़ में सूखे तलाब की सफाई और गहराई बढ़ाने के बाद गांव के पानी को तालाब में पहुंचाया। इसे और बेहतर किया जा रहा है ताकि पूरे क्षेत्र में हरियाली भी बढ़े। तलाब के साथ साथ खुद से आरडब्ल्यूए के सहयोग से जीरो रेन वाटर फ्लो आउट वसंत कुंज की शुरुआत की गई है। वर्षा जल संचय को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि जल संरक्षण की इस मुहिम को आगे बढ़ाया जा सके।
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