पुलिस ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी कि उपहार सिनेमा अग्निकांड में सबूतों से छेड़छाड़ मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद रियल एस्टेट कारोबारी सुशील और गोपाल अंसल की बेगुनाही का अनुमान नहीं है। उनकी सात साल की जेल की सजा को निलंबित नहीं किया जाना चाहिए।
विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) दयान कृष्णन ने न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद को बताया कि महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ के कारण द्वितीयक को साक्ष्य दर्ज करवाने पड़े। नतीजतन निचली अदालत की कार्यवाही में काफी देरी हुई।
उन्होंने कहा कि अंसल समेत इस मामले के आरोपियों ने उपहार अग्निकांड मामले से जुड़े साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर लाभ लेने की साजिश रची। अभी भी देरी और बुढ़ापे का हवाला देते हुए सजा को निलंबित करने की मांग कर रहे हैं।
अंसल ने सबूतों से छेड़छाड़ मामले में अपनी सात साल की जेल की सजा के निलंबन के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर की थी। दिसंबर में एक सत्र अदालत ने मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से दोषी साबित होने पर सजा के निलंबन की याचिका को खारिज करते हुए जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया था।