संयुक्त किसान मोर्चा ने 25 सितंबर को भारत बंद का एलान किया है। दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन के नौ महीने पूरे होने पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के समापन पर मोर्चा ने इसकी घोषणा की। सम्मेलन में आंदोलन में पिछले नौ महीने में आए उतार-चढ़ाव पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
26 नवंबर, 2020 से किसान नए तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), विद्युत संशोधन अधिनियम और एनसीआर के शहरों में प्रदूषण नियंत्रण संबंधी विधेयक के तहत किसानों पर मुकदमा दर्ज न करने की मांग पर सरकार के रवैये का विरोध जता रहे हैं।
दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर प्रेसवार्ता कर संयोजक आशीष मित्तल ने संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से 25 सितंबर को भारत बंद की घोषणा की। ठीक एक साल पहले भी किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में देशव्यापी बंद किया था। उम्मीद जताई कि पिछले साल कोरोना काल होने की वजह से इतनी सफलता नहीं मिली थी, लेकिन इस बार यह आंदोलन अधिक सफल होगा।
शुक्रवार को किसानों की तरफ से आयोजित अखिल भारतीय सम्मेलन में 22 राज्यों के 3000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। इस मौके पर किसान संगठनों के सदस्य, महिलाएं, श्रमिकों और आदिवासियों के साथ-साथ अन्य वर्गों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
पिछले नौ महीने के दौरान किसानों के संघर्ष के दौरान आए उतार-चढ़ाव पर चर्चा की गई तो प्रतिनिधियों ने इस आंदोलन को हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश का न होकर पूरे देशव्यापी आंदोलन करार दिया।
सुलह की तरफ नहीं बढ़े कदम
तीन कॉर्पोरेट समर्थक कृषि कानूनों को निरस्त करने, सभी फसलों के एमएसपी की कानूनी गारंटी, बिजली विधेयक-2021 को निरस्त करने सहित एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) प्रबंधन आयोग विधेयक-2021 के तहत किसानों पर मुकदमा नहीं चलाने की मांगों को किसानों ने दोहराया। सरकार और किसान हमेशा बातचीत के लिए खुद को राजी बता रहे हैं, लेकिन सरकार संशोधन की कवायद कर रही है तो किसान तीनों कानूनों के रद्द होने सहित सभी मांगें माने जाने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर रहे हैं। किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो 2024 तक भी आंदोलन खत्म नहीं होगा।
कॉरपोरेट्स के भरोसे नहीं रहना चाहते हैं किसान
किसानों को डर है कि एमएसपी प्रणाली को खत्म कर दिया जाएगा, जिससे किसान कॉरपोरेट्स की दया पर निर्भर होंगे। सरकार और किसानों के बीच 10 दौर से अधिक दौर की वार्ताएं बेनतीजा रहीं। नतीजतन, गतिरोध नौ महीने बाद भी बरकरार है।
5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में होगी ऐतिहासिक महापंचायत
5 सितंबर को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फनगर में किसानों ने ऐतिहासिक महापंचायत की घोषणा की है। 2022 के मिशन यूपी के तहत किसानों, ग्रामीण, युवाओं सहित सभी वर्गों के हितों की आवाज उठाएंगे। किसान नेता अतुल अंजान ने कहा कि आंदोलन के दौरान करीब 650 से अधिक लोगों की मौत के बाद भी सरकार का रवैया नहीं बदला है। अगर रुख नहीं बदला तो विरोध कमजोर नहीं और तेज होगा। इस मौके पर जगमोहन सिंह, राजाराम सिंह, केवी बीजू और सत्यवान के अलावा दूसरे किसान नेताओं ने कहा कि किसान आंदोलन ने प्रेम और भाईचारा की मिसाल कायम की है।