नई दिल्ली। दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी खालिद सैफी ने पुलिस द्वारा उसे अस-सलाम-आलेकुम कहने पर दंगों में लिप्त होने का तर्क रखने पर सवाल उठाया है। सैफी ने कहा कि यदि सलाम करना गैरकानूनी है तो मैं सलाम कहना बंद कर दूंगा। इतना ही नहीं उसने पुलिस पर भारी-भरकम आरोपपत्र के लिए 20 लाख पेपर बर्बाद करने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला दर्ज करने का भी तर्क रखा।
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष पेश किए गए सैफी ने दंगों के मामले में अपनी जमानत पर जिरह के दौरान पुलिस द्वारा शरजील इमाम की जमानत के दौरान अभियोजन पक्ष के उस तर्क पर आपत्ति जताई कि ‘अस-सलाम-आलेकुम’ शब्द यह दिखाने के लिए पर्याप्त है कि उसका भाषण एक विशेष समुदाय के लिए था।
सैफी ने कहा मैं हमेशा अपने दोस्तों को सलाम करता हूं। मुझे लगता है कि अगर यह गैरकानूनी है तो मुझे यह नहीं करना चाहिए। इतना ही नहीं उसने कहा कि जब वे जमानत पर जेल से बाहर आएंगे तो एनजीटी में पुलिस के खिलाफ मामला दर्ज करवाएंगे क्योंकि पुलिस ने इस चार्जशीट पर 20 लाख कीमती कागजात बर्बाद कर दिए हैं।
सैफी ने अदालत के समक्ष सवाल किया कि क्या अस-सलाम-आलेकुम कहना गैरकानूनी है या अभियोजन पक्ष का अनुमान है। अदालत ने कहा यह अभियोजन पक्ष का तर्क था न कि अदालत का कथन।
एक सितंबर को जमानत पर आपत्ति जताते हुए विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने अलीगढ़ में शरजील इमाम द्वारा दिए गए 16 जनवरी, 2020 के भाषण का हवाला देते हुए कहा था कि वह भाषण को अस-सलाम-आलेकुम कहकर शुरू करते हैं, जो दर्शाता है कि यह केवल एक समुदाय को संबोधित कर रहे है न कि जनसभा को।
सुनवाई के दौरान विकास खालिद सैफी और उमर खालिद, नताशा नरवाल, देवांगना कलिता, आसिफ इकबाल तन्हा सहित अन्य आरोपी विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई में शामिल हुए।
जमानत पर जिरह के दौरान सैफी ने अदालत के समक्ष कहा कि उसे नागरिकता संशोधन अधिनियम और एनआरसी के विरोध में उनकी भागीदारी के बारे में किसी को भी स्पष्टीकरण नहीं देना है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को विरोध करने का अधिकार है जो अपने आप में एक साजिश का संकेत नहीं है।