एक मिनट की भी दूरी होती तो बिल्डिंग के पिछले हिस्से में रहने वाला आर्यन मलबे की चपेट में आ जाता। लेकिन सोमवार को भाग्य ने उसका साथ दिया और आर्यन की जान बच गई। आर्यन इसके लिए खुद को खुशकिस्मत मानता है। आर्यन ने बताया कि लक्ष्मण प्रसाद के नाम से इस पूरी इमारत को जाना जाता है। इसमें पिछले हिस्से में उसका परिवार रहता है। जबकि आगे का हिस्सा रिश्तेदारों के पास था। कुछ दिनों पूर्व उसके रिश्तेदारों ने अगले हिस्से के ग्राउंड फ्लोर को राजेंद्र अरोड़ा नामक शख्स को बेच दिया था। पिछली इमारत और फ्रंट साइट की इमारत का फर्श का लेवल अलग-अलग था। इस वजह से राजेंद्र का बेटा मोहक अरोड़ा वहां खुदाई करवाकर उसे लेवल में करने का प्रयास किया जा रहा था।
आर्यन ने बताया कि लक्ष्मणा प्रसाद बिल्डिंग के अगले हिस्से में नीचे दुकानें बनी थी जबकि ऊपरी हिस्सा खंडर बना हुआ था। पिछले 40 गज के हिस्से में नीचे भी दुकानें बनी थी। पहली मंजिल पर आर्यन की दादी सत्या देवी रहती हैं। दूसरी मंजिल पर आर्यन के पिता अजय अनेजा, मां दीपिका अनेजा और भाई अभियव अनेजा रहता हैं। सोमवार को अजय का सेंट स्टीफन अस्पताल में ऑपरेशन चल रहा था। दीपिका अभियव वहीं पर थे। आर्यन घर पर था। पहली मंजिल पर रहने वाली उसकी दादी दूध लेने बाहर निकली थी। इस दौरान नीचे उतरकर आर्यैन काम बंद करवाने गया था। जैसे ही वह इमारत के अगले हिस्से से निकला, अचानक बिल्डिंग गिर गई। आर्यन का कहना है कि उसकी इमारत नहीं गिरी, लेकिन उसकी हालत भी जर्जर है।
स्थानीय लोगों का कहना लगातार हो रही बारिश से गिरी इमारत...
स्थानीय लोगों का कहना है कि मकान गिरने में एक बड़ा कारण लगातार हो रही बारिश है। पिछले कई दिनों से इलाके में बारिश हो रही है। ऐसे में कमजोर मकानों के गिरने का खतरा बना रहता है। सोमवार को हुआ हादसा इसका ही नतीजा था। बारिश की वजह से मकान गिर गया। अब लोगों को बाकी जर्जर मकानों की चिंता सता रही है।