कश्मीर की एसिड अटैक की पीड़िता को अभी भी अपनी आंखों की रोशनी वापस आने का इंतजार है। घटना के 27 दिन बाद भी वह रात के अंधेरे में चीखती है और उस दृश्य को याद कर सिहर जाती है रोने लगती है जब उस पर हमला हुआ था। उसका चेन्नई के एक मशहूर अस्पताल में इलाज चल रहा है।
पीड़िता की बहन एरिजू निसार कहती हैं कि घटना के बाद से हम उसके साथ ही हैं। इस घटना ने हमें डरा दिया है। पीड़िता के पिता निसार चिल्लू कहते हैं, मुझे यकीन है कि दोषियों को सजा दी जाएगी और ऐसी सजा दी जाएगी जिससे दूसरे लोग भी डरेंगे। एरिज़ू का कहना है कि उसकी बहन की अब तक बड़ी और छोटी कई सर्जरी हो चुकी हैं, पीड़िता की रातों की नींद हराम हो चुकी है। वह अक्सर रात में जागती है और डर कर उस हमलावर से बचाने के लिए चीखने लगती है जिसने उस पर एसिड अटैक किया था। घटना के बाद से पीड़िता आमतौर पर गुमसुम रहती है, उसे उम्मीद है कि जल्द ही न्याय मिलेगा।
पीड़िता के चचेरे भाई सज्जाद मिसगर ने बताया कि डॉक्टरों ने अब तक उनकी आंखों की तीन सर्जरी की है, चूंकि उनकी बाईं आंख तेजाब के प्रभाव से बुरी तरह सिकुड़ गई है। उसमें रोशनी आने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। डॉक्टर अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं, स्टेम सेल उपचार भी दिया गया है। मुझे यकीन है कि मेरी बहन की आंखों की रोशनी लौट आएगी। इसके अलावा उसके चेहरे की तीन स्किन ग्राफ्टिंग की गई हैं।
उनके अधिवक्ता मीर नवीद गुल ने उसके साथ अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए कहा, वह निश्चित रूप से एक बहादुर महिला है जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने में कामयाब रही है। मुझे यकीन है कि एक दिन वह अपने पैरों पर खड़ी होगी और देखेगी। जम्मू कश्मीर पुलिस ने घटना के बाद तीन हफ्ते के अंदर तीन आरोपियों साजिद अल्ताफ राथर और मोहम्मद सलीम कुमार उर्फ तोता और एक किशोर के खिलाफ एक हजार पृष्ठों की चार्जशीट दायर की है। उन्होंने कहा कि वह अदालत से अनुरोध करेंगे कि किशोर के खिलाफ भी वयस्क की तरह ही मुकदमा चलाया जाए।
दैनिक सुनवाई का अनुरोध करेगी पुलिस
श्रीनगर के एसएसपी राकेश बलवाल कहते हैं कि हमने एक सख्त आरोप पत्र दायर किया है और हम इस मामले में दैनिक सुनवाई के लिए अदालत में याचिका दायर करेंगे। यदि दैनिक सुनवाई संभव नहीं है, तो हम अदालत से शीघ्र सुनवाई के लिए अनुरोध करेंगे।