वायु प्रदूषण की गंभीर होते हालात पर शिकंजा कसने के लिए नई दिल्ली पालिका परिषद(एनडीएमसी)ने निर्माण गतिवधियों पर पाबंदी को लागू कर दिया है। एनडीएमसी की ओर से इसके तहत नई दिल्ली क्षेत्र में चार जगहों पर चल रहे निर्माण को रोकते हुए उनपर जुर्माना किया गया है। परिषद की टीम लगातार हालात पर नजर रख रही है ताकि नियमों का उल्लंघन न हो सके।
पालिका परिषद की टीम की तरफ से सोमवार को चार जगहों पर चल रही निर्माण गतिविधियों को रोक दिया गया। इसके तहत वाणिज्य भवन, उत्तराखंड सदन, कौशल भवन सहित मानसिंह रोड पर भी एक साइट पर चल रहे निर्माण को रोक दिया गया है। धूल कणों से प्रदूषण न हो इसलिए एनडीएमसी की तरफ से कार्रवाई की जा रही है। एनडीएमसी के एक अधिकारी के मुताबिक चार जगहों पर निर्माण गतिविधियों को रोक दिया गया है।नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी)के आदेश के तहत 50-50 हजार रुपये का जुर्माना किया गया है। सरकार की ओर से निर्माण गतिविधियों पर रोक के बावजूद चल रहे निर्माण को रोकने के लिए एनडीएमसी की तरफ से कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
रोजाना 250 किलोमीटर के दायरे में की जा रही है सड़कों की सफाई
प्रदूषण के कारण बढ़ते संकट को देखते हुए नई दिल्ली पालिका परिषद(एनडीएमसी)ने सख्ती बढ़ा दी है। धूल प्रदूषण को रोकने के लिए दिन-रात के वक्त शिफ्ट में चार मैकेनिकल रोड स्वीपर से सड़कों की सफाई की जा रही है। धूल को रोकने के लिए 18 स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि प्रदूषण को बढ़ने से रोका जा सके। एनडीएमसी के दायरे में रोजाना करीब 250 किलोमीटर में प्रदूषण को बढ़ने से रोकने के लिए साफ सफाई की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बुधवार को वायु गुणवत्ता निगरानी आयोग ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के साथ संयुक्त बैठक की। बैठक में दिल्ली की ओर से पड़ोसी राज्यों को दिल्ली मॉडल पर काम करने की सलाह दी गई है। वहीं, प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने दिल्ली में रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान का दूसरा चरण 19 नवंबर से तीन दिसंबर तक चलाने का निर्णय लिया है।
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली की तरफ से बैठक दिल्ली-एनसीआर सभी जगह वर्क फ्रॉम होम लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही उद्योगों को भी बंद करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को एक साथ नियंत्रित किया जा सके। बैठक में दूसरे राज्यों ने भी अपनी-अपनी बात रखी है। अब आयोग के अंतिम निर्णय का इंतजार है, जिसके आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई शुरू करेगी। उन्होंने निर्णय पर उम्मीद जताते हुए कहा कि संयुक्त बैठक से एक संयुक्त कार्य योजना निकल कर आएगी, जिसे सभी राज्य मिलकर लागू करेंगे। इससे प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सकेगा।
केंद्र के एक ही हलफनामे में दो तथ्य से असमंजस
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में दो तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। एक तथ्य यह कह रहा है कि दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में चार फीसदी पराली का योगदान है। वहीं, दूसरा तथ्य पराली का योगदान 35 से 40 फीसदी बता रहा है। दोनों ही तथ्य सही नहीं हो सकते हैं। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से तथ्यों को सार्वजनिक तौर पर साफ करने का निवेदन किया है।
सफर के आंकड़ों से अलग हैं केंद्र के आंकड़े
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि केंद्र की संस्था सफर ने चार नवंबर से 14 नवंबर तक का डाटा सार्वजनिक किया है। सफर के मुताबिक, चार नवंबर को दिवाली के दिन पराली का योगदान 25 फीसदी था। पांच नवंबर को 36 फीसदी, छह नवंबर को 41 फीसदी, सात नवंबर को 48 फीसदी, आठ नवंबर को 30 फीसदी, नौ व 10 नवंबर को 27 फीसदी, 11 नवंबर को 26 फीसदी, 12 नवंबर को 35 फीसदी, 13 नवंबर को 31 फीसदी और 14 नवंबर को 12 फीसदी आंकड़ा था। यदि चार नवंबर से 14 नवंबर के डाटा का औसत निकालते हैं तो यह लगभग 31 फीसदी होता है। यह डाटा केंद्र सरकार का है जबकि कोर्ट के अंदर सौंपा गया डाटा भी केंद्र का ही है।
तीन दिसंबर तक चलेगा रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान
प्रदूषण नियंत्रण के लिए गत 18 अक्तूबर से शुरू हुआ रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान तीन दिसंबर तक चलेगा। दूसरे चरण के तहत इसकी अवधि को बढ़ाया जा रहा है। पहले चरण के तहत 18 नवंबर तक यह अभियान खत्म हो रहा था। पहले की तरह ही लगभग 100 चौराहों पर 2500 सिविल डिफेंस वालेंटियर लोगों को जागरूक करने के लिए काम करेंगे। गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली में प्रत्येक वाहन चालक 10 से 12 चौराहों से गुजरता है और प्रतिदिन करीब 30 मिनट तक ईंधन जलाता है, जिसका उसके लिए कोई उपयोग नहीं है।