आस-पड़ोस के रोजगार पर भी असर
आमूमन ठेके के आसपास चखना के लिए कई दुकानें खुल जाती हैं। अंडे की दुकान, चाट-पकौड़ों की दुकान, चना-चबेना की दुकान चलाने से हजारों लोगों का रोजगार जुड़ा होता है। पुरानी दुकानें बंद होने से इन लोगों का रोजगार खत्म होता दिख रहा है।
सरकारी दुकानों पर काम करने वालों को भी संकट
सरकारी दुकानों के बंद होने से सरकारी कर्मचारियों के लिए भी संकट है। अब उन्हें किसी और काम में सरकार को जोड़ना पड़ेगा। इनमें कई ऐसे कर्मचारी भी शामिल है जो सेवा निवृत होने वाले है। ऐसे में अगर उन्हें दूसरा काम सौंपा गया तो उनके लिए बेहद मुश्किल होगा। फिर सरकार ने भी उन कर्मचारियों को स्पष्ट नहीं किया है कि उनकी नई जिम्मेदारी क्या होगी। सरकार की तरफ से कर्मचारियों को एक्शन प्लान नहीं बताया गया है।
मिक्स लैंड यूज भी समस्या
जहां नया ठेका खोलना है वहां जमीन की समस्या भी होगी। नरेला इलाके की बात करें तो यहां शराब केंद्र खोलने के लिए लैंड यूज चेंज करना होगा। तभी शराब केंद्र खोले जा सकेंगे। इसमें एक महीने से अधिक का वक्त लग सकता है। इसी तरह डीडीए ने मिक्स लैंड यूज में शराब की दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी है। अगर नई नीति के तहत शराब की दुकान मिक्स लैंड यूज में खोली जाती है तो फिर डीडीए नियम-कायदों के अनुसार व्यवधान उत्पन्न कर सकता है।