उन्होंने कहा मामले में मुख्य आयोजक वकील अश्विनी उपाध्याय को पहले ही जमानत मिल चुकी है। प्राथमिकी नारेबाजी को लेकर है उस समय उनका मुवक्किल वहां नहीं था। वहीं दिल्ली पुलिस की और से पेश अधिवक्ता तरंग श्रीवास्तव ने कहा कि सभी आरोपियों ने एक साथ काम किया और कथित रूप से सांप्रदायिक नारे लगाने के समय प्रीत सिंह की अनुपस्थिति उन्हें किसी भी दायित्व से मुक्त नहीं करेगी। इतना ही नहीं उसने अपने साक्षात्कार में भी एक विशिष्ट समुदाय का उल्लेख किया, जो एक ही मामले का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि मुख्य आयोजक और आरोपी ने एक एक समान साक्षात्कार दिया और यह आईपीसी की धारा 153ए के तहत आता है। रही बात धारा 34 की है, इसके बाद एक सह-आरोपी ने दूसरा इंटरव्यू दिया। दूसरा फेसबुक लाइव अपलोड करता है। यह सामान इरादे को स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा कि उपाध्याय को छोड़कर सभी आरोपी हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है। कोर्ट ने तीन सितंबर को प्रीत सिंह की जमानत अर्जी पर नोटिस जारी किया था और पुलिस को अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।