उपहार अग्निकांड पीड़ित एसोसिएशन ने मुख्य उपहार अग्निकांड मामले में सबूतों से छेड़छाड़ से संबंधित मामले में मुकदमे का सामना कर रहे रियल एस्टेट कारोबारी सुशील अंसल की उस याचिका पर आपत्ति जताई है जिसमें जांच अधिकारी से पुन: जिरह करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आरोपी ने वकील बदलकर जानबूझ कर सुनवाई में देरी करने का प्रयास किया है।
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना के समक्ष एसोसिएशन के अधिवक्ता ने कहा कि यह याचिका पूरी तरह से तुच्छ और अस्पष्ट है। अदालत ने उनके तर्क सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
अंसल के वकील ने अदालत को बताया कि निचली अदालत ने सीआरपीसी की धारा 311 (सामग्री गवाह को बुलाने या मौजूद किसी व्यक्ति की जांच करने की शक्ति) के तहत उनकी याचिका का निपटारा कर दिया है जबकि वे जांच अधिकारी से जिरह करने के लिए एक और अवसर की मांग कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान एसोसिएशन अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पहवा ने दलील दी कि आरोपी के नए वकील ने रणनीतिक रूप से धारा 311 सीआरपीसी के तहत एक गवाह को वापस बुलाने के लिए आवेदन दायर किया है, जिससे पहले ही बड़े पैमाने पर उनका वकील जिरह कर चुका है।
उन्होंने कहा कि मुकदमे में पहले से ही काफी देरी हो चुकी है और देरी के कारण त्रासदी के पीड़ितों को कई बार उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर 2013 में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करवाने के लिए और यहां तक कि 2018 में ट्रायल में तेजी लाने के लिए भी आग्रह करना पड़ा है। पहवा ने कहा कि उपहार त्रासदी 1997 में हुई थी, पहले ही देरी हो चुकी है और पीड़ितों को घटना के 24 साल बाद 2021 में आज भी न्याय का इंतजार है ।