अदालत ने वकील से वीडियो को रीप्ले करने को कहा और हवा में फायर करने से ठीक पहले पठान की बंदूक की स्थिति की ओर इशारा करते हुए कहा उसकी बंदूक की स्थिति को देखें। यह सीधे दहिया पर है। अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि दोनों फायर में से किसी की भी आवाज हेड कांस्टेबल की और नहीं है जबकि अभियोजन का मामला फायर दहिया पर आधारित है। उन्होंने कहा अगर उनका मुवक्किल उसे गोली मारना चाहता था तो मार सकता था लेकिन इरादा ऐसा नहीं था। उनका मुवक्किल घूमा और भाग गया। क्या इसमें से कोई भी उसे मारने या गोली मारने का इरादा प्रदर्शित करता है? यह मात्र डराने का इरादा है। पठान ने दहिया को गोली नहीं मारी बल्कि इसके बदले उन्हें कदम पीछे हटने को कहा। इसे एक गर्म वार्तालाप के रूप में देखा जा सकता है क्योंकि वह पीछे हट गया था।
उन्होंने कहा 26 सेकेंड में दहिया को मारने या उसे घायल करने के लिए पर्याप्त अवसर मिला लेकिन ऐसा नहीं किया गया, मात्र डराया गया। ऐसे में हत्या के प्रयास का मामला नहीं बनता। क्योंकि पठान का हत्या करने का कोई इरादा नहीं था। सरकारी वकील ने उनके तर्क पर आपत्ति जताते हुए कहा कि फोटो से स्पष्ट है कि आरोपी ने कांस्टेबल के सिर पर बंदूख तानी थी। उन्होंने कहा कि सवाल है कि वीडियो के पहले भाग के दौरान वह भीड़ पर विभिन्न दिशाओं में गोली मारता है, जो अलग समुदाय से संबंधित हो सकते है। मान लीजिए कि कोई व्यक्ति घायल होकर दम तोड़ देता तो क्या अपराध नहीं है।