अदालत ने स्पष्ट किया कि दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में कई आरोपियों के मोबाइल डाटा को सह-अभियुक्तों को उपलब्ध नहीं कराया जा सकता। अदालत ने कहा इसमें कथित तौर पर अश्लील सामग्री है और इससे उनकी निजता बाधित होगी।
जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद, जेएनयू की छात्रा नताशा नरवाल और देवांगना कलिता, जामिया समन्वय समिति के सदस्य सफूरा जरगर, आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और 13 अन्य इस मामले में आरोपी हैं और उन पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अपर सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई सुनवाई के दौरान आरोपियों द्वारा दायर दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 207 के तहत दायर आवेदनों पर मौखिक रूप से यह टिप्पणी की। आरोपियों ने तर्क रखा है कि उन्हें चार्जशीट में अभियोजन पक्ष द्वारा भरोसा किए गए सभी साक्ष्यों और सामग्री की प्रति के साथ आपूर्ति करने का निर्देश दिया जाए।
अदालत ने कहा कुछ ऐसे आवेदन आए हैं जहां अभियोजन पक्ष ने आवेदक को उपलब्ध कराए जा रहे अन्य सह-अभियुक्त व्यक्तियों के कुछ व्यक्तिगत आंकड़ों पर अपनी आपत्ति जताई है। उन्होंने आगे कहा कि अभियोजन पक्ष ने उन्हें कुछ तस्वीरें और विवरण दिखाए जो आरोपियों के मोबाइल फोन का हिस्सा है और यह आपत्तिजनक है।
उन्होंने कहा कि उन तस्वीरों और वीडियो के लुक से इसे किसी को उपलब्ध नहीं कराया जा सकता। अदालत ने कहा यह अश्लील सामग्री और स्वयं का वीडियो है। कुछ अश्लील वीडियो हैं, ऐसा लगता है कि आरोपी व्यक्तियों ने खुद बनाया है। ऐसे में इन वीडियों को सह-आरोपियों को देने से गोपनीयता और उनके जीवन में बाधा डाल सकते है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि सब कुछ अश्लील नहीं है, आरोपी व्यक्तियों की कुछ निजी तस्वीरें भी हैं।
इसके अलावा अदालत ने अभियुक्तों के वकीलों को निर्देश दिया कि जब भी आप कोई आवेदन दायर करे तो अभियोजन पक्ष को अग्रिम प्रति दें ताकि वे इसका उत्तर दाखिल कर सकें, या उन विशेष दस्तावेजों या वीडियो को छोड़कर सभी दस्तावेजों की आपूर्ति कर सकें। इससे पहले विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने अदालत को बताया था कि बिना किसी वर्गीकरण के सभी डेटा की आपूर्ति करने से दूसरों की निजता का उल्लंघन होगा।