हड़ताल का सबसे अधिक असर सफदरजंग अस्पताल में दिखाई दिया। यहां इमरजेंसी के बाहर एम्बुलेंस कतार में खड़ी रहीं। कुछ मरीजों को अंदर भेजा गया लेकिन थोड़ी देर बाद उनमें से कई मरीजों को बाहर निकाल दिया। यहां इमरजेंसी में वरिष्ठ डॉक्टर तैनात थे लेकिन रेजीडेंट डॉक्टरों के न होने की वजह से मरीजों को संभालना काफी मुश्किल हो रहा था। इस बीच अस्पताल में मरीज उपचार के लिए गिड़गिड़ाते भी मिले। यूपी के हाथरस निवासी आशीष ने बताया कि वह अपनी बहन को लेकर दो दिन से चक्कर लगा रहे हैं। अलग अलग अस्पतालों में जाकर उन्हें यहां सफदरजंग भेज दिया लेकिन यहां भी डॉक्टर उनकी बहन का उपचार नहीं कर रहे हैं। वे इतनी ठंड में भी सुबह तीन बजे से ही इमरजेंसी के बाहर हैं और डॉक्टरों ने उन्हें कोई जानकारी भी नहीं दी है। काफी झगड़ा करने के बाद उनकी बहन को स्ट्रेचर दी गई थी। वहीं रोहतक से आए सुमित सैनी ने बताया कि उनके पिता के पेट में पानी भर जाता है। हर बार उन्हें सोमवार को आकर सर्जरी करानी पड़ती है। डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से अब उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है और उनके पिता की हालत भी दर्दनीय है। ऐसे में कोई दूसरा अस्पताल भी मरीज को नहीं ले रहा है।
हम नहीं करना चाहते किसी को परेशान
हम किसी को भी परेशान करना नहीं चाहते हैं लेकिन लोगों को यह समझना चाहिए कि हमारे साथ भी गलत हो रहा है। सरकार हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। हम अपने परिवार को छोड़ यहां पढ़ाई कर रहे हैं और मरीजों का इलाज भी लेकिन सरकार की खामियों की वजह से हमें नुकसान हो रहा है। बार बार पत्र लिखने और अपील करने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। इन्हें पता है कि हड़ताल होगी तो मरीजों को भी दिक्कत होगी फिर डॉक्टरों की हड़ताल क्यों होने दी? क्यों समय पर हमारी काउंसलिंग नहीं कराई जा रही है? - डॉ. मनीष, राष्ट्रीय अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा)
हड़ताल के कारण सुल्तानपुरी निवासी उत्तम कुमार की पत्नी मीरा देवी की मौत हो गई। उत्तम कुमार का आरोप है कि वह 24 घंटे से भी अधिक समय से अपनी पत्नी को उपचार दिलाने के लिए डॉक्टरों से गुहार लगा रहे थे लेकिन किसी ने उनकी सुनवाई नहीं की और आखिर में अपनी आंखों के सामने उन्होंने पत्नी को दम तोड़ते देखा। उनकी पत्नी को सांस लेने में कठिनाई हो रही थी जिसके चलते वह यहां लेकर आए थे। रविवार शाम से सोमवार शाम तक जब मरीज को इलाज नहीं मिला तो वह उन्हें लेकर दूसरी जगह जाने लगे लेकिन सफदरजंग अस्पताल से कुछ दूर चलते हुए ऑटो में ही मीरा देवी ने सांसें तोड़ दीं और उनकी मौत शहो गई। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के बाहर ही रोते बिलखते उत्तम कुमार ने यह पूरी आपबीती सुनाई और कहा कि कोई डॉक्टर उन्हें बचाने नहीं आया। न जूनियर और न किसी सीनियर डॉक्टर ने इलाज किया। किसी को उनकी पत्नी की नहीं पड़ी और जमीन पर पड़ीं उनकी पत्नी जोरों से सांसें ले रहे थीं।