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दिल्लीः एमबीए गन हाउस मालिक अवैध रूप से बेचता था कारतूस, 4500 कारतूस समेत छह गिरफ्तार

Thu, 18 Feb 2021 06:10 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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delhi police - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कारतूसों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर अंबाला गन हाउस के मालिक समेत छह को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में गन हाउस मालिक समेत दो ने एमबीए किया हुआ है। इनके कब्जे से 4500 कारतूस बरामद किए गए हैं। ये गन हाउस से कारतूस लेकर दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों के बदमाशों को अवैध रूप से सप्लाई करते थे। पुलिस ने इनके पास से हुंडई कार, टाटा मंजा और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। 

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स्पेशल सेल डीसीपी संजीव कुमार यादव के अनुसार एसीपी जसबीर सिंह की देखरेख में इंस्पेक्टर विवेकानंद पाठक व कुलबीर सिंह की टीम ने एएसआई संजीव कुमार को मिली सूचना के बाद मुकुंदपुर फ्लाईओवर, आउटर रिंग रोड पर घेराबंदी कर गांव रसूलपुर, जिला कारनाल हरियाणा निवासी  रमेश कुमार(46) और कचाहारी रोड न्यू कॉलोनी, जिला इटावा यूपी निवासी दीपांशू मिश्रा(35) को 14 फरवरी को गिरफ्तार किया था।

रमेश हुंडई कार से दीपांशु को कारतूस की खेप देने आया था। दीपांशु टाटा मंजा से आया था। इनके पास से चार हजार कारतूस बरामद किए गए। पुलिस टीम ने जयपुर में दबिश देकर मुख्य सप्लायर सेक्टर-तीन, रेवाड़ी हरियाणा निवासी अमित राव(33) को 16 फरवरी को दबोच लिया।
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अमित ने दीपांशु समेत कई लोगों को अवैध रूप से कारतूस सप्लार्ई करने की बात स्वीकार की है। रमेश से पूछताछ के बाद कलंदर चौक जिला पानीपत हरियाणा निवासी इकराम(40) को पानीपत से 17 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया। 

इसके बाद इकराम के भाई व  नयाजूपूरा, शाहबुदीनपुर जिला मुजफ्फर नगर यूपी निवासी अकरम(42) को शामली रोड करनाल हरियाण से गिरफ्तार कर लिया। अकरम के पास से 500 कारतूस बरामद किए गए। इसके बाद पंचकूला से  नासरूलगढ़, जिला सहारनपुर, यूपी निवासी मनोज कुमार(39) को गिरफ्तार कर लिया। मनोज रमेश से लगातार कारतूस लेता रहता था। सभी आरोपी रमेश से अवैध कारतूसों की खेप लेते थे। 

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अमित राव का अंबाला नाम से गन हाउस था-

रमेश कुमार अंबाला गन हाउस के मालिक अमित राव के यहां दस हजार प्रति माह तनख्वाह में नौकरी करता था। तनख्वाह कम होने के कारण उसने अमित राव से कहा कि अगर वह ग्रे बाजार में कारतूस बेचेंगे तो जल्दी ज्यादा कमाई कर सकेंगे। अमित गोला बारूद बनाने वाली कंपनी से कारतूस खरीदता था और उनकी ठीक से रिकार्ड बुक में एंट्री नहीं करता था। इसके बाद महंगे दामों पर दीपांशु व अन्य लोगों को कारतूस कारतूस बेचते थे।

मार्केटिंग में एमबीए करने वाला दीपांशु नोएडा में एक साफ्टवेयर कंपनी में काम करता था। इसके पिता का इटावा में गन हाउस था। पिता की मौत के बाद इसने वर्ष 2015 में गन हाउस बंद कर दिया था। ये रमेश से कारतूस लेकर तस्करी करने लगा। दीपांशु एक कारतूस 125 रुपये में लेकर 200 से 250 रुपये में आगे बेचता था।

अमित ने भी एमबीए किया हुआ है- 
कुरूक्षेत्र यूनिवर्सिटी से एमबीए करने वाला अमित होटल मैनेजमेंट का कोर्स भी किया हुआ है। ये कई प्रतिष्ठित होटल में काम कर चुका है। इसके मामा का अंबाला गन हाउस था। इसके बाद इसे गन हाउस का लाइसेंस मिल गया। ये जयपुर में एक इंस्टीट्यूट में बतौर एडमिन हैड का काम कर चुका है।  ये पूणे स्थित कंपनी से 80 रुपये में कारतूस लेता था। ये इनका रिकार्ड बुक में इंट्री नहीं करता था। ये एक कारतूस को आगे 125 रुपये में बेचता था। मुजफ्फनगर निवासी इकराम व अकरम दोनों सगे भाई हैं। ये गन रिपयेङ्क्षरंग का काम करते थे। रमेश के संपर्क में आने कारतूसों की तस्करी करने लगे। मनोज कुमार के पास आम्र्स लाइसेंस हैं। इसकी आड़ में ये कारतूसों की तस्करी करता था।
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