एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि नवंबर के आखिरी सप्ताह में किसान आंदोलन की शुरूआत होते ही टूलकिट के निर्माण की प्लानिंग शुरू हो गई थी। इसके लिए पीजेएफ की पुनीत ने -फ्राईडे फॉर फ्यूचर-के साथ काम करने वाली निकिता और दिशा का पता लगाया।
शांतनु इनके साथ एक्सआर एनजीओ से जुड़ा था। टूलकिट तैयार करने के लिए एक दिसंबर को पुनीत ने इंस्टाग्राम के जरिये तीनों से संपर्क किया। इसके बाद दिशा ने 6 दिसंबर को एक व्हाट्सऐप ग्रुप बना लिया। सभी एक दूसरे से जुड़े रहे और टूलकिट के बारे में बातचीत करते रहे।
3 जनवरी से टूलकिट के लिए काम शुरू हो गया। 9 जनवरी को तय किया गया कि 'ग्लोबल डे ऑफ एक्शन' आंदोलन टूलकिट के जरिये होगा। 11 जनवरी को एक ईमेल आईडी बनाई गई। 11 जनवरी को ही जूम पर मीटिंग हुई। जिसमें सभी लोग शामिल हुए।