ऐप में पढ़ें

दिल्ली : कोरोना से मिली राहत तो अस्पताल के बिल ने खड़ी कर दी आफत. सोमनाथ ने किया सवाल

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 09 Sep 2021 05:39 AM IST

सार

निजी अस्पतालों में महंगे इलाज को लेकर अब तक का देश का सबसे बड़ा मामला सामने आया है। दिल्ली के एक अस्पताल ने कोरोना मरीज को इलाज करने के बाद एक करोड़ 80 लाख रुपये का बिल थमा दिया।
demo pic
demo pic
विज्ञापन

विस्तार

प्राइवेट अस्पतालों में महंगी चिकित्सा व्यवस्था को लेकर एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। दिल्ली के एक अस्पताल ने कोरोना मरीज को इलाज करने के बाद एक करोड़ 80 लाख रुपये का बिल थमा दिया। मरीज बीते 28 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती हुआ था और उसके बाद से निरंतर उपचाराधीन था। हाल ही में छह सिंतबर को उसे अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। 
विज्ञापन


इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के विधायक सोमनाथ भारती ने अस्पताल के खिलाफ जांच की मांग करते हुए अपनी ही सरकार से सख्त कदम उठाने की अपील की है।

विधायक सोमनाथ भारती ने बताया कि उनके पास कुछ दिन पहले एक महिला आई थी जिनके पति कोरोना संक्रमित होने के बाद 28 अप्रैल को साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती हुए थे। उस दौरान दूसरी लहर के चलते अस्पतालों में बिस्तर पाना भी काफी मुश्किल था। 


उन्होंने बताया कि महिला ने जब एक करोड़ 80 लाख रुपये का बिल उन्हें दिखाया तो वे भी एक बार को विश्वास नहीं कर पाए। जब उन्होंने इस बारे में अस्पताल प्रबंधन से बात की तो पता चला कि अस्पताल ने मरीज को कई दिन तक एक्मो थैरेपी दी थी। जबकि नियमानुसार यह थैरेपी किसी मरीज को अधिकतम 21 दिन तक दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में एक्मो थैरेपी पर लंबे समय तक रहने के बाद वापस घर लौटने का यह पहला मामला है। 

बहरहाल विधायक सोमनाथ भारती ने सोशल मीडिया पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ विरोध जताते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है जिसके चलते यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहा है। 

विधायक ने कहा कि सरकार को तत्काल मरीज के बिल का ऑडिट करना चाहिए। साथ ही यह भी देखना होगा कि कोविड-19 के तहत सरकार ने जो मूल्य नियंत्रण किया था उसका सही पालन हुआ अथवा नहीं। आईसीयू से लेकर वेंटिलेटर तक के अधिकतम शुल्क सरकार ने निर्धारित किए थे। 
दरअसल इस मामले से पहले गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में डेंगू ग्रस्त बच्ची का मामला सामने आया था जिसमें करीब 18 लाख के आसपास बिल बना था। इस मामले में केंद्र सरकार के राष्ट्रीय मूल्य औषधि निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने भी जांच की थी। 

महंगे बिल पर कहा, हमने जान बचाई
विधायक ने सोशल मीडिया पर लिखा कि महंगे बिल पर अस्पताल प्रबंधन के शीर्ष डॉक्टर का महिला के साथ व्यवहार भी ठीक नहीं था। यह डॉक्टर उपचार करने वाली टीम का हिस्सा नहीं थे। उनसे कहा गया कि हमने मरीज की जान बचाई है। बिल के लिए बात करने से अच्छा, परिवार को हमारा आभार व्यक्त करना चाहिए।

75 दिन तक मरीज को दिया एक्मो
साकेत स्थित मैक्स अस्पताल का कहना है कि 51 वर्षीय मरीज गंभीर रुप से बीमार थे। उन्हें 28 अप्रैल को इमरजेंसी वार्ड में लाया गया और बीते 10 मई से 75 दिन तक एक्मो थैरेपी दी गई। उन्हें डायबिटीज, हाइपरटेंशन सहित कई गंभीर परेशानियां भी थीं। 23 जुलाई को एक्मो हटाने के बाद भी मरीज आईसीयू में 16 अगस्त तक रहा। अस्पताल में चार महीने 15 दिन रहने के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया। अस्पताल ने कहा कि एक्मो अत्याधुनिक तकनीक है जो कुछ ही अस्पतालों में उपलब्ध है। मरीज और उनके परिजन उपचार को लेकर संतुष्ट थे और उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई। जबकि विधायक सोमनाथ भारती का कहना है कि परिजन काफी डरे हुए हैं। इसलिए वह कुछ भी कहने से घबरा रहे हैं। 

देश का पहला मरीज, 4 माह बाद कोरोना को हराया
अस्पताल ने कहा कि यह देश का पहला कोरोना से जुड़ा मामला है। चार महीने से भी अधिक अवधि और 75 दिन तक एक्मो थैरेपी पर रहने के बाद मरीज की जान बच पाई है। यह सब उनके बेहतर डॉक्टर और चिकित्सीय सेवाओं की वजह से संभव हो पाया है। 

कांग्रेस सांसद ने स्वास्थ्य मंत्री से की शिकायत
इस मामले को लेकर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया से भी शिकायत की है। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन से जवाब तलब करते हुए स्वतंत्र जांच समिति गठन करने और सख्त कार्रवाई की मांग भी की है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
MORE