15 फरवरी को आयोजित की गई थी बैठक
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि उनके चार फरवरी के आदेश के अनुपालन में डेंगू और अन्य बीमारियों के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए एक योजना पर चर्चा करने और चाक-चौबंद करने के लिए 15 फरवरी को एक बैठक निर्धारित की गई थी।सभी पक्षों को बैठक की सूचना भेजे जाने के बावजूद दिल्ली के शिक्षा विभाग, बाढ़ और सिंचाई विभाग, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग कार्यक्रम (केंद्र सरकार के अधीन एक विभाग) और यूपी सिंचाई विभाग बैठक में शामिल नहीं हुए।
कोर्ट को बताया गया कि राष्ट्रीय राजधानी का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश राज्य से घिरा हुआ है जिसका सहयोग डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है। वहीं दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि उसके विभागों को गलत ईमेल पर संचार भेजा गया था और अगली बैठक में एक वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेगा। कोर्ट को बताया गया कि यूपी और केंद्र राज्य की और से कोई पेश नहीं है।
पीठ ने राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग कार्यक्रम के साथ-साथ महानिदेशक (डीजी) कारागार को नोटिस जारी कर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि अगले दो सप्ताह में होने वाली बैठक में उनकी ओर से कुछ वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहें। अदालत ने दिसंबर में दिल्ली सरकार को नगर निगम अधिनियम में संशोधन करने के लिए कहा था ताकि मच्छरों के प्रजनन को सक्षम करने वाले लोगों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को बढ़ाया जा सके।
नगर निगम अधिनियम और उसके उपनियमों के अनुसार अधिकारी उल्लंघन करने वालों पर अधिकतम 500 रुपये का जुर्माना लगा सकते हैं हालांकि उन्होंने जुर्माना राशि 10 से 20 हजार रुपये तक बढ़ाने का आग्रह किया था। इस बीच दिल्ली सरकार को एक साझा पोर्टल विकसित करने के लिए पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) द्वारा दिए गए सुझाव की जांच करने और उस पर कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया है ताकि आस-पास के राज्यों से संबंधित डेंगू के मामलों की निगरानी शीघ्र कार्रवाई के लिए की जा सके।