वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले शिवलिंग को लेकर सोशल मीडिया पर प्रोफेसर ने की थी आपत्तिजनक टिप्पणी, उसके बाद किया गया मामला दर्ज। उत्तरी जिले के साइबर थाने में धार्मिक विश्वासों का अपमान कर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मामला हुआ दर्ज, मामले की छानबीन की जा रही है। प्रोफेसर का कहना है कि अपनी राय रखी पर अब उनको व परिवार को मिल रही है धमकियां। प्रोफेसर ने खुद के लिए व परिवार के लिए मांगी सुरक्षा। प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर प्रोफेसर रतन लाल ने एके-56 बंदूक का लाइसेंस देने की मांग की है।
वाराणसी की ज्ञानवापसी मस्जिद को लेकर विवाद जारी है। इस बीच दिल्ली विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने मस्जिद परिसर में मिले शिवलिंग को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना होने लगी। लोगों ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर रतन लाल ने जानबूझकर शिवलिंग का मजाक उड़ाया। घटना के बाद उत्तर-पश्चिम जिला के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने उत्तरी जिला के साइबर थाने में प्रोफेसर के खिलाफ धार्मिक विश्वास का अपमान और धार्मिक भावाओं को आहत करने का आरोप मामला दर्ज करवा दिया।
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फिलहाल पुलिस ने आईपीसी की धारा 295ए और 153ए का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। मामला दर्ज होने के बाद प्रोफेसर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का नहीं था। इतिहार होने के नाते उन्होंने इसकी समीक्षी कर अपनी राय दी है। सोशल मीडिया पर धमकियां मिलने के बाद रतन लाल ने अपने परिवार के लिए सुरक्षा की मांग करने के अलावा प्रधान मंत्री को पत्र लिखकर एके-56 राफल का लाइसेंस मांगा है। दूसरी ओर उत्तर-पश्चिम जिले के साइबर सेल में एक वकील विनीत जिंदल ने भी प्रोफेसर रतन लाल के खिलाफ इसी तरह की शिकायत दी है।
पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता शिवल भल्ला (38) परिवार के साथ ओल्ड गुप्ता कालोनी, मॉडल टाउन में रहते हैं। वह सामाजिक कार्यकर्ता है। अपने बयान में भल्ला ने बताया कि मंगलवार को वह किसी काम से नॉर्थ कैंपस आए थे। यहां आकर उनको पता चला कि हिंदू कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर रतन लाल ने फेसबुक पर वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग के बारे में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी की हुई है। इसके बाद भल्ला ने फेसबुक पर रतन लाल की पोस्ट को देखा।
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पोस्ट में शिवलिंग की फोटो भी है, उसके आगे लिखा था कि यदि यह शिवलिंग है तो ऐसा लगता है कि परिसर में बरामद शिवलिंग ऊपर से कटा हुआ प्रतीत होता है। ऐसा लगता है कि चिढ़ाने की नीयत से शायग मुस्लिम शासकों ने शिवलिंग को ऊपर से काट दिया है।
प्रो. रतन लाल ने कहा...
मामले पर रतन लाल ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंदिर में शिवलिंग है या कुछ और इसके बारे में मौलवी, पंडित या इतिहासकार ही टिप्पणी कर सकते हैं। परिसर से बरामद शिवलिंग ऊपर से कटा हुआ प्रतीत होता है। ऐसा लगता है कि जब इसका निर्माण कराया गया होता को चिढ़ाने की नियत से शायद मुस्लिम शासकों ने शिवलिंग को ऊपर से काट दिया।