नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने जिला अदालतों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल के साथ-साथ लोगों के प्रवेश को सीमित करने पर जोर दिया है। हाईकोर्ट के समक्ष पेश रिपोर्ट में पुलिस ने सुझाव दिया कि सीसीटीवी कैमरों से 24 घंटे अदालतों की सुरक्षा की निगरानी की जाए।
पुलिस आयुक्त की ओर से पेश सुझाव में कहा गया है कि अदालतें आसान निशाने पर होती हैं। लिहाजा यहां पर आवश्यक होने पर ही लोगों को प्रवेश की अनुमति दी जाए।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन व अन्य ने सुझाव दिया कि वकील सुरक्षा जांच में सहयोग करें और जो वकील इसका उल्लंघन करता है उसके खिलाफ दिल्ली बार काउंसिल उचित कार्रवाई करे।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में हॉकरों व किताबें बेचने वाले सेल्समैन के आने पर भी ध्यान आकर्षित किया। साकेत बार एसोसिएशन के सुझाव न मिलने पर अदालत ने सुनवाई 25 अक्तूबर तय कर दी।
पीठ के समक्ष पुलिस आयुक्त की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने साथ ही अदालतों की त्रिस्तरीय सुरक्षा का सुझाव दिया है। चेतन शर्मा ने कहा कि ‘मैं इसे बहुत सावधानी से कहूंगा कि भीड़भाड़ से सुरक्षा समस्या और भी गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि अदालतें आसान निशाने पर हैं।’
वहीं सुनवाई के दौरान दिल्ली बार काउंसिल (बीसीडी) ने पीठ को बताया कि अदालतों में वकीलों को इलेक्ट्रॉनिक चिप वाला एक नया स्मार्ट कार्ड से प्रवेश देने का सुझाव दिया है।
बीसीडी ने कहा है कि इस तरह के कार्ड बनाने वाली एजेंसियों से बात करने के बाद वकीलों को कार्ड जारी किया जाएगा। वकीलों को भी जांच के बाद ही प्रवेश देने का सुझाव दिया है।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर ने पीठ को बताया कि बार ने भी अपना सुझाव पेश किया है।
रोहिणी कोर्ट में 24 सितंबर को हुई गैंगवार की घटना में तीन लोगों की मौत हो गई। इस घटना पर उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर को स्वत: संज्ञान लेकर दिल्ली विधिज्ञ परिषद, सभी बार एसोसिएशन, केंद्र व दिल्ली सरकार, पुलिस आयुक्त से अदालतों की सुरक्षा मजबूत करने के बारे में अपने अपने सुझाव देने को कहा था था।
पीठ ने कहा था कि सभी हितधारकों के सुझाव जरूरी है ताकि अदालतों की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए जारी होने वाले दिशा-निर्देशों में किसी तरह की कोई खामी नहीं रहे।
पेश सुझावों के कुछ प्रमुख अंश
- अदालतों परिसरों में लोगों प्रवेश सामान्य रूप से प्रतिबंधित होना चाहिए, नितांत जरूरी होने पर ही मिले प्रवेश। उच्च न्यायालय के साथ-साथ जिला अदालतों में वकीलों को जारी किए गए डिजिटल आईडी कार्ड की स्वचालित मशीन से जांच के बाद सुरक्षा जांच के बाद प्रवेश। वकीलों के क्लर्क/मुंशी अलग से डिजिटाइज्ड पहचान पत्र जारी किए जाएं।
- वादी प्रतिवादियों के साथ-साथ वकीलों की मेटल डिटेक्टर से तलाशी ली जाए। विरोध करने वाले वकीलों पर बीसीडी द्वारा कदाचार के आरोप में कार्रवाई की जानी चाहिए।
- लॉ इंटर्न के लिए हो अलग ड्रेस
- 15 दिनों में सुरक्षा एजेंसी और बार एसोसिएशन के बीच बैठक
- त्रिस्तरीय सुरक्षा।