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World Book Fair: 10 लाख पुस्तक प्रेमियों ने जताया कि कायम है किताबों की लोकप्रियता, बिक्री से प्रकाशक गदगद

Sun, 05 Mar 2023 08:12 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

रविवार को अंतिम दिन सभी वर्ग के पाठक अपनी पसंदीदा किताबें खरीदने और मेले में अपने पसंदीदा लेखकों की एक झलक पाने के लिए पहुंचे। आखिरी पाठकों ने किताबें खरीदीं और उनपर लेखकों के ऑटोग्राफ लेने की होड़ लगी रही।
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World Book Fair - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विश्व पुस्तक मेले में नौ दिन के भीतर करीब 10 लाख पुस्तक प्रेमियों ने आकर यह साबित कर दिया कि किताबों की लोकप्रियता अभी कायम है। रविवार को अंतिम दिन सभी वर्ग के पाठक अपनी पसंदीदा किताबें खरीदने और मेले में अपने पसंदीदा लेखकों की एक झलक पाने के लिए पहुंचे। आखिरी पाठकों ने किताबें खरीदीं और उनपर लेखकों के ऑटोग्राफ लेने की होड़ लगी रही। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में इस साल 50 साल की यात्रा का उत्सव मनाया गया। इस दौरान 400 से अधिक सत्रों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में एक हजार से अधिक वक्ता और पैनलिस्ट शामिल हुए। इनमें पठन पाठन को लेकर बदलते आयामों और पुस्तकों के भविष्य पर गहराई से चर्चा हुई। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ने मेले को बेहद सफल बताया है।

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पुस्तक मेले में 150 से अधिक भाषाओं में पुस्तकें प्रदर्शित की गईं। इसके अलावा नोबल पुरस्कार विजेता एनी एनक्स, सूबेदार मेजर योगेंद्र यादव, सर्गेई लावरोव, आनंद नीलकांतन, कबीर बेदी, सूसी मॉर्गनस्टर्न, ओलिविया रुइज, ऑस्कर पुजोल, अश्विन सांघी, कुमार विश्वास, साइमन लैमोरेट, मैथ्यू बट्रेंड, जया मेहता और प्रधानमंत्री युवा योजना के युवा लेखकों जैसी प्रमुख हस्तियों की वार्ता और सेमिनार हुए। नई शिक्षा नीति पर आधारित केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के एनईपी पवेलियन में युवाओं ने आकर पढ़ाई, पाठ्यक्रम और ईयर प्लान में किए गए बदलाव को समझा। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा प्रियंका त्रिपाठी और युक्ति जैन ने बताया कि विषयों को लेकर मल्टिपल एंट्री एग्जिट, सब्जेक्ट मर्जिंग, सब्जेक्ट सेलेक्शन जैसी अनेक खूबियां नई शिक्षा नीति में हैं। अब इसे समय रहते जमीनी स्तर पर लागू कराने की आवश्यकता है।

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मेले में स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित थीम मंडप में भारी संख्या लोग पहुंचे। यहां देश के अज्ञात नायकों की कहानियों से परिचित हुए। जी-20 मंडप भी बेहद लोकप्रिय रहा, लोगों ने जी-20 सदस्य देशों की पुस्तकों का अवलोकन किया और भारत की जी-20 अध्यक्षता के बारे में जाना। युवा कॉर्नर में देश के सैकड़ो युवा लेखकों को मंच मिला। शिक्षा कॉन्क्लेव में शिक्षा, पंचायती राज, संस्कृति और प्रारंभिक बाल विकास क्षेत्रों पर चर्चा हुई।

आखिरी दिन भी कई किताबों का विमोचन
केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने द राइज ऑफ बीजेपी, सतविंदर सिंह मदौलवी ने शहीद काशी राम, गुरदेव सिंह सिंधु ने शहीद उधम सिंह, रिचा भट्ट बडोलाने ए स्लीक लाइफ: ए मेमॉयर ऑफ ऑयलमैन सतीश चंदर और कारगिल हीरोज टेन एक्सक्लूसिव इंस्पायरिंग स्टोरीज जैसी किताबों का विमोचन किया। राजकमल के जलसाघर में आस्तीक वाजपेयी की उम्मीद, त्रिपुरारि शरण की माधोपुर का घर जैसी कई किताबों का लोकार्पण हुआ। प्रभात प्रकाशन के स्टाल पर मनजीत नेगी की किताब महायोद्धा की महागाथा का विमोचन हुआ। प्रकाशन के निदेशक प्रभात कुमार ने बताया कि पाठकों ने खासा दिलचस्पी दिखाई, जिसके कारण उनके यहां करीब 12 हजार से ज्यादा किताबों की बिक्री हुई। उन्होंने कहा उम्मीद है कि आने वाले समय में पाठक किताबों के प्रति और प्रेम दिखाएंगे।

गणतंत्र दिवस की पहली शाम की झलक
पुस्तक मेले में देश की गणतंत्रता की पहली शाम पर आधारित प्रदर्शनी ने भी पुस्तक प्रेमियों को आकर्षित किया। 26 जनवरी 1950 की रात प्रतिष्ठित सार्वजनिक इमारतों, पार्कों और रेलवे स्टेशनों को रोशनी से सजाया गया था। उस अद्भुद नजारे को लोगों ने पुस्तक मेले में महसूस किया। इरविन स्टेडियम (अब मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम) में पहला गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित किया गया। डॉ राजेंद्र प्रसाद ने पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली, यह सब प्रदर्शनी में शामिल किया गया था।
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