मेले में स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित थीम मंडप में भारी संख्या लोग पहुंचे। यहां देश के अज्ञात नायकों की कहानियों से परिचित हुए। जी-20 मंडप भी बेहद लोकप्रिय रहा, लोगों ने जी-20 सदस्य देशों की पुस्तकों का अवलोकन किया और भारत की जी-20 अध्यक्षता के बारे में जाना। युवा कॉर्नर में देश के सैकड़ो युवा लेखकों को मंच मिला। शिक्षा कॉन्क्लेव में शिक्षा, पंचायती राज, संस्कृति और प्रारंभिक बाल विकास क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
आखिरी दिन भी कई किताबों का विमोचन
केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने द राइज ऑफ बीजेपी, सतविंदर सिंह मदौलवी ने शहीद काशी राम, गुरदेव सिंह सिंधु ने शहीद उधम सिंह, रिचा भट्ट बडोलाने ए स्लीक लाइफ: ए मेमॉयर ऑफ ऑयलमैन सतीश चंदर और कारगिल हीरोज टेन एक्सक्लूसिव इंस्पायरिंग स्टोरीज जैसी किताबों का विमोचन किया। राजकमल के जलसाघर में आस्तीक वाजपेयी की उम्मीद, त्रिपुरारि शरण की माधोपुर का घर जैसी कई किताबों का लोकार्पण हुआ। प्रभात प्रकाशन के स्टाल पर मनजीत नेगी की किताब महायोद्धा की महागाथा का विमोचन हुआ। प्रकाशन के निदेशक प्रभात कुमार ने बताया कि पाठकों ने खासा दिलचस्पी दिखाई, जिसके कारण उनके यहां करीब 12 हजार से ज्यादा किताबों की बिक्री हुई। उन्होंने कहा उम्मीद है कि आने वाले समय में पाठक किताबों के प्रति और प्रेम दिखाएंगे।
गणतंत्र दिवस की पहली शाम की झलक
पुस्तक मेले में देश की गणतंत्रता की पहली शाम पर आधारित प्रदर्शनी ने भी पुस्तक प्रेमियों को आकर्षित किया। 26 जनवरी 1950 की रात प्रतिष्ठित सार्वजनिक इमारतों, पार्कों और रेलवे स्टेशनों को रोशनी से सजाया गया था। उस अद्भुद नजारे को लोगों ने पुस्तक मेले में महसूस किया। इरविन स्टेडियम (अब मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम) में पहला गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित किया गया। डॉ राजेंद्र प्रसाद ने पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली, यह सब प्रदर्शनी में शामिल किया गया था।