प्रतियोगी परीक्षाओं की शिड्यूल के हिसाब से यूपीएससी की सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे आ गए हैं। बड़ी संख्या में छात्र इस वक्त सितंबर से शुरू होने वाली मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड समेत दूसरे राज्यों की लोक सेवाओं की परीक्षाएं भी सितंबर से दिसंबर के बीच होनी हैं। कोचिंग पर ताले लटकने से इनकी पढ़ाई ठप हो गई है। कमरे में बैठकर परीक्षा की तैयारी करने की जगह वह सड़क पर कोचिंग संस्थानों की लापरवाही के खिलाफ जंग लड़नी पड़ रही है।
छात्रों का कहना है कि जिस तरह हादसा हुआ, उससे उनका दिल और दिमाग भी पढ़ाई में नहीं लग रहा है। तैयारी करने वाले सभी छात्र कमोवेश एक सी नाव में सवार हैं। बीपीएससी मुख्य परीक्षा देने वाली छात्र प्रिया पांडेय का कहना है कि परीक्षा जब नजदीक हो तो वैसे ही दबाव रहता है, अब इस हादसे के बाद नये तरीके का तनाव है। इस स्थिति में मुख्य परीक्षा की तैयारी में कठिनाई हो रही है। एकाग्रता की जगह मन विचिलित होने से पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। श्वेता पांडेय का कहना है कि कोचिंग बंद होने से सिलेबस जल्द पूरा नहीं हो पाएगा। ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा तो है लेकिन क्लास में पढ़ने से दुविधा वाले सवाल का हल तुरंत मिल जाता है।
हाइब्रिड मोड में जिसने दाखिला लिया है उनकी राह थोड़ी आसान
कई बड़े-बड़े कोचिंग इनदिनों हाइब्रिड मोड में पढ़ाई करवाते है। क्लास के साथ ही उन्हें मोबाइल पर भी पढ़ाई करने की सुविधा देते है। कोविड के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई ने जोर पकड़ा था। इसके बाद यह चलन शुरू हुआ। लेकिन कई छात्र ज्यादा फीस की वजह से हाइब्रिड कोर्स में दाखिला नहीं लेते है। ऐसे छात्रों की पढ़ाई में बाधा आएगी। जिनके पास ऑनलाइन पढ़ाई करने की अनुमति है वह पढ़ाई कर सकेंगे। हालांकि इनदिनों दोनों मोड बंद पड़े है इसलिए छात्र बेहद ही चिंतिंत है।
डीयू में दाखिला लेने वालों की है अलग चिंता
हर साल दिल्ली विश्वविद्यालय में 80 हजार के करीब छात्र दाखिला लेते है। इनमें अन्य राज्यों के छात्रों की संख्या सबसे अधिक होती है। 4 अगस्त से दाखिला शुरू भी हो जाएगा। इनके सामने यह समस्या खड़ी हो गई है कि वह दाखिला लेने के बाद रहेंगे कहा। दरअसल बेसमेंट में चलने वाले कई पीजी भी बंद हो गया है। ऐसे में डीयू में दाखिला लेने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ऐसा इसलिए भी है की डीयू के कॉलेजों में हॉस्टल की भारी कमी है। इस वजह से उन्हें किराये के मकान या पीजी में रहना पड़ता है।