फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जहांगीरपुरी: सुरक्षा के बीच हालात होने लगे सामान्य, शांति और भाईचारा की तरफ बढ़ने लगी जिदंगी

Mon, 25 Apr 2022 03:31 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सी-ब्लॉक में एक सब्जी विक्रेता उर्मिला गोस्वामी ने कहा कि मैं एक सप्ताह बाद अपनी सब्जी की दुकान के साथ आई हूं। मुझे बहुत नुकसान हुआ है और बच्चों की देखभाल करना भी मुश्किल हो गया।
विज्ञापन
जहांगीरपुरी खुले बाजार - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चिलचिलाती धूप में शांति बहाली की तरफ जहांगीरपुरी में धीरे धीरे कदम बढ़ने लगे हैं। बंदिशों में मिली मामूली राहत से गलियों में दुकानें खुली तो रोजमर्रा के सामान की बिक्री धीरे धीरे होने लगी। अभी भी सड़कों पर बैरिकेडिंग होने के कारण कुछ दुकानों तक दूध सहित कुछ और खाद्य पदार्थ नहीं पहुंच रहे हैं। कुछ दुकानदार अपने सामान के लिए मुख्य सड़क पर रेहड़ी भेजकर जरूरी सामान मंगवा रहे हैं ताकि लोगों को दिक्कत न हो। दुकानदारों का यह भी कहना है कि शनिवार को हुई हिंसा के बाद दुकानें आठ दिन बाद खुलने से लोगों को काफी राहत मिली है। हालांकि दुकानदारों का कारोबार घटकर 25 फीसदी से भी कम हो गया। तिरंगा यात्रा के बाद हालात और भी बेहतर होने लगे हैं। 

विज्ञापन


बिक्री घटकर हुई 25 फीसदी से भी कम
एक हफ्ते बाद दुकानें खुलने से लोगों को काफी राहत मिली है। अब जरूरी सामान उन्हें घरों के नजदीक दोबारा मिलने लगे हैं। रविवार को एक ही कंपनी ने दूध की आपूर्ति की। जरूरी उत्पादों लेने के लिए बैरिकेड तक जाना पड़ रहा है, लेकिन दुकानें खुलने से लोगों को राहत मिली है। हालात धीरे धीरे सामान्य होने से दुकानदारों के साथ साथ ग्राहकों को भी राहत मिलेगी। हालांकि मंडी बंद होने से बिक्री घटकर 25 फीसदी से भी कम हो गई। सब्जियों की कुछ रेहड़ियां ही लग रही हैं। 
-कृपाशंकर

दुकानें खुलने से आस पड़ोस से लोगों को सभी जरूरी सामान उपलब्ध हैं। माहौल ठीक होने के बाद फिर पहले ही तरह ग्राहकों को सभी जरूरी सामान की आपूर्ति होगी। पिछले आठ दिनों में काम का नुकसान हुआ और दुकानें बंद होने से लोगों को भी परेशानी हुई। -देवेंद्र शर्मा
विज्ञापन


आशीष सोनकर ने बताया कि दुकानों की बिक्री प्रभावित हुई है। इससे हमें नुकसान भी हो रहा है। 
 

विज्ञापन

नसरीन और आमीर कुरैशी-पहले की तरह कपड़ों की बिक्री भी शुरू हो गई है। दुकानें खुलने से लोगों को जरूरी सामान की तरह कपड़े खरीदने का भी मौका मिल रहा है। सूती के कपड़े खरीदने के लिए लोग हर तरफ से आते हैं और हालात सुधरने के बाद बिक्री और बढ़ेगी।

फल विक्रेता महबूब ने बताया कि मेरी कमाई न के बराबर रह गई है। ऐसे हालात होने से छोटे दुकानदारों के लिए परेशानी बढ़ जाती है। 

सी-ब्लॉक में एक सब्जी विक्रेता उर्मिला गोस्वामी ने कहा कि मैं एक सप्ताह बाद अपनी सब्जी की दुकान के साथ आई हूं। मुझे बहुत नुकसान हुआ है और बच्चों की देखभाल करना भी मुश्किल हो गया। पहले लॉकडाउन के कारण दुकानें बंद थी। अब इन झड़पों से चिंतित हैं। सबसे ज्यादा परेशानी दुकानदारों को ही होती है। छोटे बच्चों का पेट भरना मुश्किल हो जाता है। 

दुकानदार चंपा दास ने कहा कि हिंसा के बाद दुकानें बंद कर दी गईं। 2-3 दिन बाद अपनी दुकान खोली है। हालात पहले से काफी बेहतर हुए हैं। रेडीमेड कपड़ों के दुकानदार सुंदर सिंह ने कहा कि तीन दिन तक दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। मुझे रोजाना करीब 4,000 रुपये का नुकसान हो रहा है। सुंदर ने कहा कि कुछ आपराधिक तत्व हैं जो इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। अपने फायदे के लिए दो समूहों के बीच हिंसा भड़काना उनका काम है, ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए। नईम की ओर इशारा करते हुए सुंदर ने कहा कि मेरा बड़ा भाई पिछले दो घंटे से मेरे साथ बैठा है। उन्होंने हमारे साथ चाय भी पी और हमारे पास एक दूसरे के खिलाफ कुछ भी नहीं है। वह पूछने आया था कि हम कैसे हैं और हम भी उनके घर जाते हैं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें