मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर द्वारा पहली सरकारी यात्रा के लिए शेख फरीद के शहर को चुनने के पीछे कई मायने हैं। शहर के नौकरशाह और नेता दोनों अपने-अपने हिसाब से विश्लेषण कर रहे हैं कि आखिर इसकी वजह क्या है, जबकि मंत्रिमंडल में इस शहर को जरा भी तवज्जो नहीं मिली।
खट्टर आरएसएस के स्वयंसेवक रहे हैं। फरीदाबाद में प्रचारक के तौर पर काम किया है। इसलिए उनका इस शहर से पुराना और जज्बाती लगाव है।
मुख्यमंत्री ने खुद बताया कि उन्होंने अपना सार्वजनिक जीवन 1 जुलाई 1980 को इसी धरती से शुरू किया था। यहां से लेकर हथीन तक उन्होंने प्रचारक के तौर पर यहां की नब्ज टटोली है। आज उनके साथ नेताओं और अफसरों का लश्कर है लेकिन कुछ दिन पहले तक ऐसा कुछ नहीं था।
यह उनकी कर्मभूमि है। उन्हें पता है कि यह औद्योगिक शहर गुड़गांव और नोएडा से काफी पिछड़ गया है। इस बात की भी जानकारी है कि नौकरशाहों के गलत रवैये के कारण जनता परेशान है।
मंत्रिमंडल गठन के बाद से फरीदाबाद के विधायकों एवं जनता में इस बात का असंतोष है कि यहां का कोई विधायक मंत्री नहीं बनाया गया। इस दौरे से इस नाराजगी को दूर करने की कोशिश भी की गई है।