एम्स के आरपी सेंटर में काला मोतिया पर कार्यक्रम का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। 40 साल के बाद आंखों की नियमित जांच से काला मोतिया से बचा जा सकता है। एम्स में डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र के सामुदायिक नेत्र विज्ञान के डॉक्टरों ने इसे लेकर विशेष सलाह जारी की है। इसमें डॉक्टरों ने कहा कि पिछले कुछ समय से काला मोतिया के मामले बढ़ रहे हैं। इसकी रोकथाम के लिए 40 वर्ष से अधिक आयु होने पर हर साल आंखों की जांच नेत्र विशेषज्ञ से करवानी चाहिए।
काला मोतिया का इलाज दवाइयों, ऑपरेशन व लेजर से संभव है। इलाज शुरू होने पर डाक्टरों के सलाह के बिना बंद नहीं करना चाहिए। नियमित जांच व उचित उपचार से काला मोतिया से होने वाली अंधता से बचा जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि जिनके परिवार में पहले से काला मोतिया है उनको यह बीमारी होने की आशंका अधिक हो जाती है। ऐसे परिवार को साल में एक बार जांच जरूर करवानी चाहिए। काला मोतिया दृष्टि के चोर के रूप में जाना जाता है। ग्लूकोमा में आमतौर पर आंख के अंदर दबाव बढ़ जाता है। दबाव के कारण ऑप्टिक तंत्रिका को नुकसान होता है। जिससे देखने का दायरा सीमित होने लगता है।
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काला मोतिया के लक्षण
- आंख व सिर में दर्द
- जलते हुए बल्ब के चारों ओर रंगीन घेरा दिखना
- नजदीक के चश्मे का नंबर बार-बार बदलना
मरीज को सामने की वस्तुएं स्पष्ट, लेकिन साइड की दिखेगी धुंधली