दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण फिर आपात श्रेणी के कगार पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, बुधवार को इस पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि वाहनों के लिए अब पेट्रोल के बजाय हाइड्रोजन आधारित जापानी तकनीक लाने पर विचार किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में सम-विषष्म लागू किए जाने के फैसले को लेकर केजरीवाल सरकार को नोटिस जारी किया है। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने दिल्ली सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को 1 अक्तूबर से 14 नवंबर तक का वायु गुणवत्ता सूचकांक के आंकडे़ देने को भी कहा है।
पीठ ने पिछले साल 1 अक्तूबर से 31 दिसंबर तक के भी आंकडे़ मांगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश वकील संजीव कुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। मामले की अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी। वहीं, दिल्ली सरकार का दावा है कि दिल्ली में इस नियम को लागू करने के बाद प्रदूषण कम हुआ है क्योंकि 15 लाख कारें दिल्ली की सड़कों पर नहीं उतर रही हैं।
इस बीच, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर सम-विषम बढ़ाया जा सकता है। राजधानी में 15 नवंबर तक फिलहाल यह योजना लागू है, लेकिन प्रदूषण का स्तर अभी भी खतरनाक स्तर पर है।
दिल्ली-एनसीआर में बुधवार को प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही वायु गुणवत्ता ‘आपात’ श्रेणी के नजदीक जाती दिख रही है। पिछले 15 दिन में दूसरी बार प्रदूषण का इतना प्रकोप देखने को मिल रहा है।
सुबह 11:30 बजे दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 454 रहा, वहीं, फरीदाबाद में 436, गाजियाबाद में 468, ग्रेटर नोएडा में 459, गुड़गांव में 450 और नोएडा में 469 रहा। वायु प्रदूषण गुणवत्ता सूचकांक के मुताबिक, वायु की गुणवत्ता का स्तर 201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच बेहद खराब, 401 से 500 के बीच गंभीर और 500 से ऊपर गंभीरतम श्रेणी में माना जाता है।