साहिल ने बताया कि कोरोना संक्रमित होने के बाद उनके सैंपल को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा गया था। तब तक मुझे अपने घर में क्वारंटीन रहने के लिए कहा गया। मैंने वैसा किया भी और घर में सुरक्षित रहा। तीन दिन बाद मुझे फोन आया कि ओमिक्रॉन संक्रमण की पुष्टि हुई है। थोड़ी देर बाद एक एंबुलेंस भी वहां आई और उन्हें लेकर लोकनायक अस्पताल पहुंच गई।
अस्पताल में साहिल को मिले 40-45 मरीज
साहिल को उस वक्त लोकनायक अस्पताल में करीब 40 से 45 मरीज भी मिले जो ओमिक्रॉन संक्रमण की चपेट में आए थे लेकिन लक्षण किसी में भी नहीं था। न कोई बुखार से परेशान था न किसी को सर्दी थी। साहिल दोनों वैक्सीन की खुराक भी ले चुके थे। साहिल को भी कोई परेशानी नहीं थी। इसलिए सब मरीज बोल रहे थे कि अस्पताल में उन्हें क्यों रोक कर रखा गया है?
'डेल्टा वैरिएंट से कम घातक, सरकार की व्यवस्था से खुश हूं'
साहिल ने कहा, ‘मुझे ऐसा लगता है कि डेल्टा वैरिएंट तो काफी घातक था, हमने कुछ महीने पहले हालात देखे थे लेकिन ओमिक्रॉन को लेकर मुझे लगता है कि यह गंभीर नहीं है। मुझे न बुखार हुआ, न गले में दर्द हुआ। मेरे परिवार में कोई भी संक्रमित नहीं हुआ है। हम सभी को सरकार का साथ देना चाहिए और जब से वे संक्रमित हुए हैं तब से लेकर अभी तक सरकार की व्यवस्था उन्हें बेहद पसंद आई है। किसी भी तरह की लापरवाही का अनुभव उन्होंने नहीं किया है।’