नई दिल्ली/चंडीगढ़। लंबे समय बाद फिर से हरियाणा कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की हनक दिखेगी। पार्टी ने संगठन में फेरबदल करते हुए प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा को हटाकर पूर्व विधायक और हुड्डा के विश्वासपात्र उदयभान को प्रदेश की कमान सौंपी है। पंजाब का हाल देख पार्टी ने सभी को साधा और जातीय संतुलन भी बनाया। जाट बिरादरी से पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पौत्री श्रुती चौधरी तो रामकिशन गुर्जर, सुरेश गुप्ता और ब्राह्मण नेता जितेंद्र भारद्वाज को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। हालांकि, फेरबदल में हुड्डा गुट के आगे कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य कुलदीप बिश्नोई किनारे ही रह गए। अब उन्हें चुनाव से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कुमारी सैलजा का इस्तीफा स्वीकार कर उनकी जगह उदयभान को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बीते दस सालों में दो प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने के बाद अब हुड्डा के भरोसेमंद को कमान मिली है। प्रदेश कांग्रेस में तत्कालीन अध्यक्ष अशोक तंवर और हुड्डा परिवार में घमासान चरम पर पहुंचने के बाद सितंबर 2019 में पार्टी ने अशोक तंवर को हटाकर सैलजा को अध्यक्ष बनाया था। तब हुड्डा को विधानसभा में दल का नेता बनाकर मामला शांत किया गया था। दो साल बाद हरियाणा में चुनाव को देखते हुए पार्टी पंजाब की तरह नुकसान नहीं उठाना चाहती है। यही कारण है कि हुड्डा को खुश करने के लिए उनके करीबी दलित नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर विवाद को शांत करने का प्रयास किया।
सभी को ऐसे साधा : पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पौत्री और वर्तमान विधायक किरण चौधरी की पुत्री श्रुति चौधरी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर आलाकमान ने किरण चौधरी को साधा है। जितेंद्र भारद्धाज हुड्डा के करीबी हैं। लंबे समय से उनकी निष्ठा हुड्डा के साथ है। लिहाजा हुड्डा उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनवाने में कामयाब रहे। सुरेश गुप्ता रणदीप सुरजेवाला के खेमे से हैं और रामकिशन गुर्जर सैलजा के करीबी। इस तरह से आलाकमान ने किसी को नाराज नहीं किया है।
अब हुड्डा को दिखाना होगा तिलों में कितना तेल : पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा लंबे समय से यह कहते आए हैं कि आलाकमान उन पर भरोसा करे वे कांग्रेस की झोली में हरियाणा डाल देंगे। पिछले चुनाव में टिकट वितरण में उनकी पूरी तरह से नहीं चली लेकिन अधिकतर विधायक वही बनें जिनकी टिकट की पैरवी हुड्डा ने की थी। हुड्डा हमेशा से यह चाहते रहे हैं कि प्रदेश अध्यक्ष उनकी मर्जी का हो लेकिन अशोक तंवर के समय से तकरार चल रही है। दो साल बाद चुनाव हैं। हुड्डा को अब साबित करना होगा कि तिलाें में तेल अभी बाकी है। यह बात अलग है कि 2024 का चुनाव इतना आसान नहीं होगा।
कैसे बदला घटनाक्रम : हुड्डा मंगलवार दोपहर गुरुग्राम से किसी कार्यक्रम में होडल जा रहे थे। रास्ते से ही कार्यक्रम रद्द कर एआईसीसी की बैठक में पहुंचे और अपनी बात रखी। रात को उन्होंने एक पत्र पर अपनी बात लिखकर आलाकमान को दी। बुधवार दोपहर 12 बजे दीपेंद्र हुड्डा सोनिया गांधी से मिले। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष और चार कार्यकारी अध्यक्ष का पत्र जारी हुआ। मंगलवार तक तीन ही कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने थे। बाद में रणदीप सुरजेवाला के कहने पर सुरेश गुप्ता का नाम शामिल किया गया।
उदयभान लगातार चौथे दलित प्रदेशाध्यक्ष : दलित प्रदेशाध्यक्ष के स्थान पर कांग्रेस ने एक बार फिर दलित नेता पर ही विश्वास जताया। उदयभान लगातार चौथे दलित प्रदेशाध्यक्ष होंगे। उनसे पहले फूलचंद मुलाना, अशोक तंवर व कुमारी सैलजा लगातार तीन दलित प्रदेशाध्यक्ष पद संभाल चुके हैं। मुलाना का कार्यकाल काफी लंबा रहा। तंवर ने भी पांच साल से अधिक समय तक कमान संभाली। अब पार्टी का जिम्मा उदयभान के कंधों पर आया है। देखना यह है कि वह पार्टी की नैया 2024 में पार लगा पाते हैं या नहीं।
अध्यक्ष बनाने के लिए अध्यक्षा सोनिया गांधी का धन्यवाद। मुझे जो जिम्मेदारी सौंपी है उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाऊंगा।
- उदयभान, हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष