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सावधानी ही सुरक्षा: मुफ्त में पायरेटेड मूवी देखी तो हैकर्स के हवाले होगा स्मार्टफोन, जानें इससे बचने के तरीके

Fri, 16 Sep 2022 09:32 PM IST
Vikas Kumar माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा

सार

साइबर विशेषज्ञ ने बताया कि विश्वभर में प्रत्येक वर्ष छह ट्रिलियन डॉलर साइबर हमलों के नुकसान और उससे बचने के लिए एंटी वायरस सिस्टम में कंपनियां खर्च कर देती हैं। वहीं, विश्वभर में प्रत्येक वर्ष साइबर क्राइम के 56.60 करोड़ लोग शिकार हो जाते हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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टेलीग्राम से पायरेटेड मूवी, कंप्यूटर-लैपटॉप में पायरेटेड विंडो समेत तमाम एप्लीकेशन मुफ्त में उपयोग करने की आदत हमारे स्मार्ट फोन-लैपटॉप और डेस्कटॉप को हैकर्स के हवाले कर देती है। थोड़े से लालच में ही अनजाने में हम साइबर क्राइम का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में सबसे बड़ी सुरक्षा है साइबर अपराध को लेकर जागरूक होना है। शुक्रवार को लॉयड बीटेक कॉलेज में अमर उजाला फांडेशन की ओर से साइबर क्राइम जागरूकता कार्यशाला में साइबर एक्सपर्ट सूर्य प्रताप सिंह ने विद्यार्थियों के मसक्ष कही। इस दौरान कॉलेज के निदेशक डॉ. राजीव अग्रवाल ने भी विद्यार्थियों को संक्षेप में साइबर अपराधों से विद्यार्थियों को सचेत किया। 

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हैकिंग क्लब इंस्टीट्यूट के निदेशक सूर्य प्रताप ने विद्यार्थियों को बताया कि साइबर अपराध से बचने के लिए अलग-अलग तरह के सॉफ्टवेयर आते हैं, लेकिन सबसे बेहतर तरीका है साइबर जानकारी होने से सुरक्षा। इससे लालच में आएंगे तो हैकिंग का शिकार होना तय है। इसलिए किसी भी तरह का लालच न करें। 

उन्होंने बताया कि अक्सर अपराधी एटीएम में छेड़छाड़ कर फिशिंग को अंजाम देते हैं। भारत में करीब 74 फीसदी एटीएम पुराने विंडो सॉफ्टवेयर पर चल रहे हैं। ऐसे में मशीनों में गड़बड़ी करना आसान हैं। बैंकिंग से बेहतर सुविधा मिलने के बावजूद स्थानीय कंप्यूटर-हार्डवेयर इंस्टॉल करने वाले एटीएम के कंप्यूटर पर पायरेटेड विंडो डाल देते हैं। उन्होंने बताया कि यदि किसी एटीएम में लिखा आ रहा हो कि ‘विंडो इज नॉट जेनुअन’ तो ऐसे एटीएम का उपयोग नहीं करना चाहिए। 

साइबर विशेषज्ञ ने बताया कि विश्वभर में प्रत्येक वर्ष छह ट्रिलियन डॉलर साइबर हमलों के नुकसान और उससे बचने के लिए एंटी वायरस सिस्टम में कंपनियां खर्च कर देती हैं। वहीं, विश्वभर में प्रत्येक वर्ष साइबर क्राइम के 56.60 करोड़ लोग शिकार हो जाते हैं। खास बात यह है कि कोविड महामारी के दौरान पिछले दो वर्षों में यह आंकड़ा 600 फीसदी यानि छह गुना बढ़ गया। अमेरिका (38 प्रतिशत) के बाद सबसे अधिक भारत (17 प्रतिशत) की कंपनियां सबसे अधिक साइबर हमलों का शिकार होती हैं। इस मौके पर हैकिंग क्लब इंस्टीट्यूट की मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्पर्श सक्सेना, डॉ. अरुण प्रताप श्रीवास्तव, डॉ. एएलएन राव मौजूद रहे। 

मॉलवेयर से बचने के लिए सबसे जरूरी है जानकारी और जागरूकता
साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि मॉलवेयर (मेलेशियस सॉफ्टवेयर-गंदा सॉफ्टवेयर) से बचने के लिए एंटीवायरस आते हैं। एंटीवायरस जहां वायरस से बचाता है वहीं, फायरवॉल साइबर हमले से बचाता है। हालांकि, यदि जानकारी हो तो इससे बेहतर तरीके से बचा जा सकता है। जो अमर उजाला कर रहा है। 
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हार्डवेयर हैकिंग से बचने के उपाय
सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि सॉफ्टवेयर की तरह हार्डवेयर हैकिंग से भी सचेत रहना चाहिए। इसके लिए पेन ड्राइव की तरह दिखने वाले उपकरण का पहचानना आना चाहिए। वहीं, हैकिंग के लिए आने वाली डाटा केबल भी आपका कंप्यूटर हैक कर सकती है। 
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