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60 सोसाइटियों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद, एनजीटी ने लगाई फटकार

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नोएडा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मंगलवार को 60 सोसाइटियों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) शुरू किए बिना बिल्डरों को आंशिक अधिभोग प्रमाणपत्र जारी करने के कारण प्राधिकरण को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही, प्रवर्तन निदेशालय को रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ हवा व जल अधिनियम के तहत आपराधिक कार्रवाई करने को कहा है।
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इस संबंध में सेक्टर-137 निवासी अभिष्ट कुसुम गुप्ता ने नवंबर 2018 में एनजीटी में याचिका दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते हुए एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 72 एसटीपी के दावे के विपरीत ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में केवल 12 एसटीपी ही चल रहे हैं। बिल्डरों को फ्लैट बेचने की सुविधा के लिए आंशिक अधिभोग प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं, जो प्रथम दृष्टया अपराध है। वाटर एंड ईपी एक्ट के साथ शर्तों के तहत इस नीति की समीक्षा करनी होगी। पीठ ने कहा कि प्राधिकरण अधिकारी ने भरोसा दिलाया है कि वह व्यक्तिगत रूप से निगरानी करेंगे, लेकिन यह तब तक व्यावहारिक नहीं हो सकता जब तक योग्य पर्यावरण पेशेवर की ओर से संचालित एक समर्पित निगरानी सेल न हो।
मेंटेनेंस चार्ज के बावजूद एसटीपी न चलाना अपराध
सुनवाई के दौरान मौजूद मेरठ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने एनजीटी को बताया कि विशेष कानून, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के कारण बिल्डरों के खिलाफ आईपीसी अपराध दर्ज नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि जहां आवश्यक हो, वहां सीआरपीसी की धारा 133 भी लागू की जा सकती है। मेंटेनेंस चार्ज लेने के बावजूद एसटीपी संचालित न किया जाना वायु, जल अधिनियमों के तहत अपराध है। यह 2002 की धारा 3 के तहत अपराध है, इसलिए प्रवर्तन निदेशालय को इस तरह के अपराधों में उल्लंघन कर्ताओं और मिलीभगत के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मामले को देखने की जरूरत है।
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कोंडली नाले से अपशिष्ट जल नोएडा में प्रवेश करने से रोकें
कोंडली नाले के अपशिष्ट जल पर ग्रीन पैनल ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि कोई भी अपशिष्ट जल कोंडली नाले से नोएडा में प्रवेश न करे। कोंडली एसटीपी को मानकों का पालन करना चाहिए और उचित उपयोग व अपशिष्ट का निपटान करें। ट्रिब्यूनल ने नोएडा प्राधिकरण, शहरी विकास विभाग, उत्तर प्रदेश और मुख्य सचिव दिल्ली और केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) को आगे की कार्रवाई करने और ई-मेल से तीन माह के भीतर अनुपालन की स्थिति दर्ज करने का निर्देश दिया है।
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