मान्यता है कि रावण का जन्म बिसरख में हुआ था और यहां शिव मंदिर में स्थापित शिवलिंग की रावण के पिता विश्वश्रवा पंडित ने पूजा की थी। उन्हीं के नाम पर बिसरख गांव का नाम पड़ने की भी बात कही जाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि बिसरख गांव में पीछे कई वर्षों से दशहरा पर रावण दहन नहीं किया जाता है। कुछ वर्ष पहले रावण दहन किया गया था, लेकिन उसे दौरान गांव में कई लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद से ग्रामीणों ने रावण दहन करना बंद कर दिया था। हालांकि रावण को लेकर गांव में कई बार विवाद भी हो चुके हैं।
साल-2020 में एक व्यक्ति ने गांव में रावण का पुतला बनाकर फूंक दिया था। उस दौरान विवाद हो गया और फिर इसे बंद कर दिया गया। गांव में रावण का मंदिर बनाया गया और उसमें रावण की मूर्ति स्थापित करने पर भी जमकर विवाद हुआ, लेकिन बाद में मूर्ति स्थापित करा दी गई।
लोगों का कहना है कि बिसरख गांव का नाम विश्वश्रवा पंडित और रावण के पिता पर पड़ा था। यहां पर मंदिर में जो शिवलिंग है उसका कोई ओर-छोर नहीं है। चंद्रा स्वामी ने यहां आकर शिवलिंग को खुदवाया था। मगर बताया जाता है कि 100 फुट के बाद भी उसका कोई छोर नहीं मिला।