जेवर। नोएडा एयरपोर्ट के दूसरे चरण (विस्तारीकरण) के लिए जमीन अधिग्रहण से पहले जेवर के 6 गांवों के प्रभावित किसान परिवारों का सामाजिक समाघात निर्धारण (एसआईए) के सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। सर्वे के कार्य में जुटी गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय की 6 सदस्यीय टीम ने रिपोर्ट तैयार कर 25 सितंबर को शासन को भेज दी है। छह गांवों से ली जाने वाली 1365 हेक्टेयर जमीन से 4 हजार किसान प्रभावित होंगे। तीन गांव के 2500 किसानों को विस्थापित करना पड़ सकता है। 1185 हेक्टेयर भूमि किसानों से अधिगृहीत की जाएगी।
अधिकारियाें के अनुसार, करौली बांगर, दयानतपुर, कुरैब, रन्हेरा, मुढरह, बीरमपुर गांव की 1185 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। जिला प्रशासन इन गांवों में 10 अक्तूबर से जन सुनवाई शुरू कराने की तैयारी कर रहा है। किसानों ने सर्वे टीम से कहा है कि वह विकास के लिए जमीन देने के तैयार हैं, लेकिन उन्हें 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के मुताबिक मुआवजा मिलना चाहिए। साथ ही, विस्थापन की जगह किसानों की सहमति से चुनी जाए। करौली बांगर के किसानों ने साफ किया है कि गांव के किसान खेती की जमीन को देने के लिए तैयार हैं, लेकिन एयरपोर्ट की सीमा पर आ रहे उनके गांव का विस्थापन नहीं किया जाना चाहिए। इसके बाद यीडा और सर्वे टीम दोनों ने इस गांव को विस्थापन से बाहर रखने के लिए रिपोर्ट भेजी है।
किस गांव की कितनी जमीन का होगा अधिग्रहण
कुल 1365 हेक्टेयर जमीन को अधिसूचित किया गया है। इसमें 124 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। इसे सीधा नागरिक उड्डयन विभाग के नाम करा दिया जाएगा। 57 हेक्टयर जमीन का यीडा पहले से अधिग्रहण कर चुका है। करौली बांगर की 159 हेक्टेयर, दयानतपुर की 145, कुरैब की 326 रन्हेरा की 458 मुंढरह की 46 और बीरमपुर की 49 हेक्टेयर खेती की जमीन सहित कुल 1185 हेक्टेयर का अधिग्रहण किया जाना है।