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रूस-यूक्रेन के बीच लंबी चली रार तो पटरी से उतरेगा कारोबार

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नोएडा (योगेश शर्मा)। रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े युद्ध से कोरोना की मार झेल चुके निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। दोनों देशों के बीच विवाद और ज्यादा बढ़ा तो यूरोपीय देशों से व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा। जनपद के करीब 19 हजार रेडिमेड गारमेंट और इंजीनियरिंग उद्योगों पर इसकी सबसे ज्यादा मार पड़ेगी। उद्योग विशेषज्ञों की मानें तो दोनों देशों के बीच छिड़े संघर्ष का असर आने वाले कुछ ही दिनों में दिखाई देगा।
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नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (एनईएसी) के अनुसार भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप कॉटन टेक्सटाइल और रेडिमेड गारमेंट का बड़ा बाजार है। हालांकि यूक्रेन को ज्यादा टेक्सटाइल प्रोडक्ट निर्यात नहीं किए जाते, लेकिन रूस से निर्यातकों को बड़े ऑर्डर मिलते हैं। साल 2020 में 405 और 2021 में 500 करोड़ रुपये से अधिक के टेक्सटाइल प्रोडक्ट व परिधान रूस को निर्यात किए गए थे। दोनों देशों के बीच विवाद का असर अब यूरोपीय देशों पर दिखने लगा है, जिसका टेक्सटाइल और परिधान उद्योग पर बड़ा असर पड़ेगा। रेडिमेट गारमेंट का हब कहे जाने वाले गौतमबुद्ध नगर के चार हजार से अधिक छोटे-बड़े वूल सिल्क, जूट टेक्सटाइल, हेंडीक्राफ्ट, हौजरी व गारमेंट उद्योग और इनमें काम करने वाले दस लाख से अधिक श्रमिक इससे प्रभावित होंगे।
भारत के इंजीनियरिंग उद्योग काफी हद तक रूस और यूक्रेन से आयात होने वाले आयरन, मेटल, स्टील, बेस मेटल, बॉयलर और मशीनरी पर निर्भर हैं। साल 2020 में रूस से 1800 करोड़ और यूक्रेन से 378 करोड़ से अधिक का इंजीनियरिंग रॉ मैटेरियल आयात हुआ था, जबकि 2020 में रूस से 2000 करोड़ और यूक्रेन से 303 करोड़ से अधिक का रॉ मैटेरियल आयात हुआ था। जनपद में करीब 15 हजार इंजीनियरिंग उद्योग हैं, जिन पर दोनों देशों के विवाद का बड़ा असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है।
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परिधान उद्योगों को 100 करोड़ का झटका
रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ी तनातनी के बाद कई देशों ने रूस पर आर्थिक पाबंदियां लगाना शुरू कर दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय कारोबार जगत में हलचल तेज हो गई। इसका असर जनपद के परिधान उद्योग पर भी दिखा है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव बंसल ने बताया कि अभी किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं की जा सकती है, लेकिन रूस से करीब 100 करोड़ रुपये के ऑर्डर रुकने का शुरुआती आकलन लगाया जा सकता है।
तेल के खेल का दिखेगा असर
कारोबारियों को सबसे ज्यादा चिंता पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने को लेकर है। दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम ने ऊंची छलांग लगाई है। रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक है। विवाद तकरार में बदलते ही कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। जल्द ही इसका असर स्थानीय स्तर पर दिख सकता है। बृहस्पतिवार को शहर में पेट्रोल के दाम 95.49 रुपये और डीजल के दाम 87.14 रुपये प्रति लीटर दर्ज किए गए।
अभी स्थिति सामान्य है, लेकिन जिस तरह टकराव बढ़ रहा है उससे आने वाले दिनों में बड़े नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है। यूरोपीय देशों से कारोबार प्रभावित हुआ तो भारतीय परिधान निर्यातकों पर बुरा असर पड़ेगा। - ललित ठुकराल, चेयरमैन-एनएईसी
दो साल से कोरोना की मार झेल रहे उद्योग जगत के सामने अब रूस और यूक्रेन विवाद की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। भारतीय अर्थव्यवस्था में इसकी उथल-पुथल दिखने लगी है। तेल के दाम बढ़े तो बड़ी मुश्किलें पैदा हो जाएंगी। - लव मल्होत्रा-उद्योग विशेषज्ञ
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भारत विश्व के लिए प्रमुख बाजार है। दोनों देशों से अच्छे व्यापारिक रिश्ते हैं। इस वजह दोनों देशों के बीच युद्ध का असर व्यापार को निश्चित रूप से प्रभावित करेगा। - बीआर भाटी, उद्यमी इंडियन केबल्स ग्रेनो
दोनों के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते प्रगाढ़ हैं। इस कारण यहां के उद्यमियों पर भी इसका व्यापक असर पड़ेगा। केंद्र सरकार को इस दिशा में कारगर पहल करने की जरूरत है। - आदित्य घिल्डियाल, उपाध्यक्ष अग्नि एसोसिएशन
रूस व यूक्रेन की लड़ाई का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ेगा। हमारी कंपनी प्लास्टिक व लोहे से बने रैक बनाती है। दोनों चीजें यूक्रेन से आयात होती हैं। इसका असर बाजार व उत्पाद पर पड़ेगा। - प्रदीप जुनेजा, उद्यमी रैकिंग इंडिया, ग्रेनो
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