हर महीने थाने जाते थे लाखों रुपये
सूत्र बताते हैं कि साल-2012 में सरिया के अवैध कारोबार की हर माह करीब 40 से 50 लाख रुपये माहवार अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों और थानों तक जाते थे। कुछ माह पहले तक यह राशि डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।
दिल्ली से लखनऊ तक पहचान
रवि का एकछत्र राज था और उसकी गाड़ियों को किसी भी थानाक्षेत्र में अवैध तरीके से ले जाने के बावजूद कोई रोक टोक नहीं थी। इतना ही नहीं यदि रवि का कोई काम फंसता था तो पुलिस अधिकारी ही उसके लिए सिफारिश करते थे। मोटी कमाई के कारण वह दिन-प्रतिदिन तरक्की कर रहा था और उसी तरह अधिकारियों से लेकर नेताओं को साधने लगा। उसने कब दिल्ली से लेकर लखनऊ तक अधिकारी और नेताओं के समक्ष पैठ बना ली, किसी को पता नहीं चला।
विधानसभा की टिकट पर चुनाव लड़ा
इतना ही नहीं रवि ने राजनीति में पैठ बनाने के लिए अपनी भाभी को जेवर से विधान सभा का चुनाव लड़ाया था। सपा और भाजपा दोनों ही पार्टियों ने न सिर्फ नेता उनके साथ रहे बल्कि अधिकारियों ने भी जमकर साथ दिया। मगर कुछ दिन पहले जब अधिकारियों का बदला गया तो रवि के भी बुरे दिन शुरू हो गए।
अधिकारियों का रहा है पूरा संरक्षण
कमिशनरेट पुलिस ने करीब आठ माह पहले रवि के लिए जाल बिछाया था, लेकिन उसके कई बडे़ स्तर के अधिकारियों ने सचेत कर दिया तो वह शांत बैठ गया। मगर अब जैसे ही सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया तो आला अधिकारियों के संज्ञान में डालने के बाद रवि काना पर कार्रवाई शुरू की गई।