गढ़ी चौखंडी गांव में पांच मंजिला इमारत के भूतल पर बने फ्लैट में सोमवार सुबह एसी फटने के बाद आग लग गई। हादसे में फ्लैट निवासी दो सगी बहनों की जलकर मौत हो गई। जबकि माता, पिता और भाई झुलस गए। तीनों को ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल ले जाया गया। जहां से उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रेफर कर दिया गया। सोमवार सुबह हुए हादसे के बाद पांच मंजिला इमारत और आसपास इलाके में अफरातफरी मच गई। ऊपरी मंजिल पर बने चार फ्लैटों में रहने वाले 20 लोगों ने बांस की सीढ़ियों व गैस पाइपलाइन के सहारे उतरकर अपनी जान बचाई। तीन दमकल ने करीब 30 मिनट में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया।
सेक्टर-121 स्थित गढ़ी चौखंडी गांव में बिल्डर के बनाए गए पांच मंजिला इमारत के भूतल पर बने फ्लैट में मूल रूप से खत्री बाड़ा, बुलंदशहर निवासी दिनेश सोलंकी, पत्नी ममता सोलंकी (32), बेटे शिवा (5), रुद्राक्षी (11) और कृतिका (9) के साथ रहते थे। वह ग्रेटर नोएडा के न्यू हॉलैंड कंपनी में काम करते हैं। सोमवार सुबह करीब 5 बजे सभी लोग घर में सो रहे थे। तभी एसी में अचानक शॉर्ट सर्किट के बाद धमाका हुआ और आग लग गई। देखते ही देखते आग पूरे फ्लैट में फैल गई। इसमें कृतिका और रुद्राक्षी की जलकर मौत हो गई। वहीं दिनेश, पत्नी ममता व बेटे शिवा गंभीर रूप से झुलस गए। तीनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से तीनों को सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया। दिनेश करीब 75 फीसदी झुलस गए हैं। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। जबकि उनकी पत्नी ममता और बेटा शिवा 20 से 22 फीसदी तक झुलसे हैं।
तीन दमकल वाहनों ने करीब आधे घंटे में आग पर काबू पा लिया। सोमवार दोपहर बाद हादसे में जान गंवाने वाली दोनों बच्चियों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान पुलिस व परिजन मौजूद थे।
सोमवार सुबह करीब 5 बजे एसी में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। आग ने भूतल पर बने फ्लैट को चपेट में ले लिया। हादसे के समय पूरा परिवार सो रहा था। उन्हें समय से पता नहीं चल पाया। हादसे में दो बहनों की मौत हो गई। जबकि तीन परिजन झुलस गए। - अंकुर अग्रवाल, एडीसीपी, नोएडा सेंट्रल
इमारत के पास संकरा है रास्ता, 100 मीटर पहले रोका दमकल
जिस इमारत में आग लगी है वहां का रास्ता संकरा है। घटनास्थल से करीब 100 मीटर पहले दमकल को रोककर अग्निशमन कर्मचारियों ने पाइप के सहारे आग बुझाने का काम शुरू किया। इस दौरान घटनास्थल के आसपास लोगों की भीड़ जुट गई थी।
हादसे के बाद इमारत खाली कर चले गए लोग
गढ़ी चौखंडी के जिस इमारत में आग लगी उसके चार अन्य फ्लैटों में रहने वाले लोग वहां से चले गए हैं। चारों फ्लैट में ताला लगा हुआ है। पड़ोसियों का कहना है कि चार फ्लैटों में रहने वाले लोग अपने नाते रिश्तेदारों या मित्र के घर चले गए हैं। अभी वे लोग काफी डरे हुए हैं।
लोगों ने देर से दमकल पहुंचने का लगाया आरोप
स्थानीय लोगों ने दमकल की टीम भी देर से आने का आरोप लगाया है। वहीं अग्निशमन विभाग का कहना है कि सुबह 5:55 बजे आग की सूचना मिली थी। जिसके 10 से 15 मिनट में अग्निशमन विभाग की टीम वहां पहुंच गई थी।
परिवार के उठने से पहले ही घर में भर गया था धुआं
हादसे के वक्त सभी सदस्य सो रहे थे। इस बीच पूरे घर में धुआं भर गया। परिजनों की माने तो जब तक दिनेश कुछ समझ पाते तब तक देर हो चुकी थी। वह पत्नी और बेटे को लेकर बाहर निकलने में कामयाब रहे। लेकिन दूसरे कमरे में सो रही दोनों बेटियां आग में फंस चुकी थी। आग की लपटें इतनी तेज हो गईं कि वह बेटियों को बचा नहीं पाए।
कई गैस पाइपलाइन के सहारे उतरे, कुछ ने सीढ़ियों की मदद से बचाई जान
नोएडा। गढ़ी चौखंडी गांव के पांच मंजिला इमारत के भूतल में जिस वक्त आग लगी उस वक्त लोग सो रहे थे। आग का पता चलते ही इमारत के चार अन्य फ्लैटों में रहने वाले करीब 20 लोगों की जान सांसत में आ गई। चारों मंजिल पर बने फ्लैट से निकलने का रास्ता ग्राउंड फ्लोर से होकर जाता था। जहां आग लगी थी। आग की लपटें व धुआं देखकर लोगों के बीच अफरातफरी मच गई। कोई गैस पाइप लाइन पकड़ कर नीचे उतरा तो कोई बांस की सीढ़ी के सहारे नीचे आया। पहली मंजिल पर रहने वाले नरेंद्र शर्मा अपनी वृद्ध मां को पहली मंजिल से नीचे लटकाकर सकुशल बाहर निकाला। तो कई ने पड़ोसी की बालकनी में जाकर अपनी जान बचाई किया। करीब आधे घंटे तक वहां पर अफरातफरी मची रही।
अवैध है पांच मंजिला इमारत, मानकों का खुला उल्लंघन
गढ़ी चौखंडी गांव में जिस पांच मंजिला इमारत में आग लगी वह अवैध है। इसके आसपास भी दर्जनों की संख्या में ऐसा ही अवैध निर्माण किया गया है। जहां बिल्डर ने बगैर नियम व मानकों के संकरे रास्तों पर इमारतें खड़ी कर दी हैं। इमारत में आग से बचाव के भी कोई उपकरण नहीं थे। प्राधिकरण के क्षेत्र में इस तरह की इमारतें कैसे बनी, यह बड़ा सवाल है। अगर ये इमारतें मानकों के अनुरूप बनता तो लोगों की जान भी बच जाती है और इमारत में रहने वाले अन्य लोगों को परेशानी भी नहीं होती।