एलईडी विज्ञापन फ्रॉड
एलईडी विज्ञापन के नाम पर कंपनी ने एक हजार से अधिक लोगों से ठगी की
- पीड़ितों ने पुलिस को दी जानकारी, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार तक के लोग हुए शिकार
- मास्टरमाइंड संदीप मध्यप्रदेश में पहले भी फर्जी कंपनी बनाकर कर चुका है ठगी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। दुकानों पर एलईडी विज्ञापन के नाम पर नोएडा की फर्जी कंपनी ने एक हजार से अधिक लोगों से करोड़ों की ठगी की है। पीड़ितों ने पुलिस को इसकी जानकारी व दस्तावेज दिए। आरोपी पहले भी कई राज्यों में अलग-अलग कंपनी बनाकर ठगी कर चुके हैं। अब नोएडा कमिश्नरेट पुलिस इस फ्रॉड की जांच कर रही है। इस मामले में कोतवाली फेज वन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है।
दुकानों पर एलईडी विज्ञापन से कमाई करने का झांसा देकर ठगी करने के मामले में कई नई जानकारी सामने आई है। इस मामले में इटावा निवासी भाजपा नेता सुखवेंद्र सिंह ने पुलिस से शिकायत की थी कि नोएडा के सेक्टर-3 स्थित सिटी प्राइम ब्रॉडकास्टिंग कंपनी की तरफ से फेसबुक समेत सोशल मीडिया पर विज्ञापन दिया गया था। इसमें बताया गया था कि दुकानों पर एलईडी लाइट व एलईडी विज्ञापन लगाकर कुछ रकम निवेश कर हर महीने कमाई कर सकते हैं। इसके साथ ही उनकी दुकानों का अलग से विज्ञापन होगा। इसके बाद इटावा के कई छोटे व मध्यम दुकानदारों ने कंपनी से संपर्क किया। सिटी प्राइम ब्रॉडकास्टिंग कंपनी की तरफ से बताया गया कि यह एक तरह की निवेश योजना है। इसके तहत एक एलईडी विज्ञापन के लिए 1.10 लाख रुपये देने होंगे। इससे दुकान के आगे एलईडी लगाई जाएगी और इस पर विज्ञापन दिया जाएगा। इसके एवज में 10 से 15 हजार रुपये प्रति महीने मिलेंगे। सुखवेंद्र सिंह ने बताया, जालसाजों ने यूपी, बिहार, राजस्थान, हरियाणा से लेकर महाराष्ट्र समेत राज्यों में ठगी की है। नोएडा जोन के एडीसीपी मनीष मिश्र का कहना है कि कोतवाली फेज वन थाने में इस मामले में मुकदमा दर्ज है और जांच की जा रही है।
मास्टरमाइंड है आरोपी संदीप
पीड़ितों का आरोप है कि इस गिरोह में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल हैं। हालांकि मास्टमाइंड संदीप है जो तकनीक का जानकार है। संदीप ने इस फर्जीवाड़ा स्कीम का सॉफ्टवेयर बनाया है। संदीप पहले मध्यप्रदेश में भी फर्जी कंपनी बनाकर ठगी की वारदात को अंजाम दे चुका है। इन कंपनियों के डायरेक्टर इनके साथी ही होते हैं।
बाउंसर व महिलाओं को करते हैं आगे
पीड़ितों का कहना है कि जालसाज एक आईडी यानी एक एलईडी विज्ञापन के नाम पर 75 हजार से 1 लाख 10 हजार रुपये लेते हैं। इसके एवज में हर महीने 12 से 15 हजार देने का वादा करते हैं। एक दो महीने बाद रकम मिलना बंद हो गया तब कई लोग नोएडा स्थित कंपनी गए तो वहां महिला कर्मचारियों व बाउंसरों को आगे कर दिया गया। इसके बाद वहां से पीड़ित वापस लौट गए।