मुनाफे का सेंसेक्स दिखाकर आईटी इंजीनियर से 1.39 करोड़ की ठगी
- चार महीने तक मुनाफे का दिया झांसा, व्हाट्स एप ग्रुप पर जोड़कर ठगी की वारदात को अंजाम
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। निवेश कराने के नाम पर मुनाफे का सेंसेक्स दिखाकर आईटी इंजीनियर से 1.39 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने का मामला सामने आया है। जालसाजों ने व्हाट्सएप ग्रुप पर जोड़कर चार महीने तक मुनाफे का झांसा दिया और ठगी की वारदात को अंजाम दिया। मामले में पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। साइबर थाने की टीम मामले की जांच कर रही है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट निवासी विश्वदीप सरकार एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में आईटी इंजीनियर हैं। करीब चार महीने पहले उनके व्हाट्स एप पर कॉल आई और कॉलर ने एक शेयर ट्रेडिंग कंपनी का अधिकारी बताया। उसने कहा कि उसकी कंपनी अच्छी ट्रेनिंग व जानकारी देकर मुनाफा दिलाती है। इसके बाद जालसाज ने एक व्हाट्स एप ग्रुप में जोड़ लिया और उसपर कई लोग पहले से जुड़े थे। व्हाट्स एप ग्रुप में सभी लोग मुनाफे के बारे में बताते रहते थे। इस पर विश्वदीप का विश्वास और बढ़ गया। इसके बाद एक के बाद एक करके कई बार में 1 करोड़ 39 लाख रुपये जालसाजों के बताए अलग अलग खातों में भेज दिया। इधर जालसाज काफी अधिक रकम मुनाफे का दिखा रहे थे। जब पीडि़त ने रकम वापसी के लिए जालसाजों से कहा तब अलग अलग मदों में और भी रकम मांगी गई। तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और पुलिस से शिकायत की। इस मामले में साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस उन खातों की जांच कर रही है। जिनमें ठगी की रकम गई है।
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महाराष्ट्र व पश्चिम बंगाल के खातों में गई रकम
इस मामले की जांच की गई तब पता चला कि ठगी की रकम कई खातों में गई है। इनमें अधिकतर खाते महाराष्ट्र व पश्चिम बंगाल के हैं। पुलिस अब उन खातों के बारे में पता लगा रही है। आशंका जताई जा रही है कि पश्चिम बंगाल के गैंग ने इस ठगी की वारदात को अंजाम दिया है। साइबर टीम इसके लिए काम कर रही है।
निवेश के नाम पर लगातार ठगी
पिछले कुछ महीनों से निवेश, रिव्यू, टास्क पूरा कराने समेत के नाम पर सबसे अधिक ठगी की वारदात हो रही है। इस ठगी की ट्रेंड में अब फर्जी स्टॉक एक्सचेंज जैसा सेटअप शामिल कर लिया गया। दरअसल साइबर जालसाज सबसे पहले इस तरह की ठगी के लिए सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सएप, एक्स, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, फेसबबुक आदि के माध्यम से लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद ऐसे लोगों को घर बैठे लाखों रुपये की कमाई का झांसा देकर विश्वास में ले लेते हैं। इस मॉड्यूल के तहत ठगी के शिकार लोगों को टेलीग्राम, व्हाट्स एप ग्रुप में जोड़ कर रिव्यू का टास्क देते हैं। इसके बाद किसी साइट या क्रिप्टो में निवेश कराने के लिए प्रेरित करते हैं।
खातों की पड़ताल के बाद करते हैं संपर्क
साइबर ठगी की बड़ी घटनाओं में शामिल जालसाज होमवर्क करने के बाद किसी से संपर्क करते हैं। साइबर क्राइम विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरा खेल डेटा से संबंधित है। जालसाजों के पास बैंकों का डेटा मौजूद होता है। इस डेटा से खातों की पड़ताल करने के बाद टेलीग्राम,व्हाट्स एप आदि पर संपर्क कर उन्हें झांसा देकर फंसाते हैं। इस तरह के मामलों की जांच में पुलिस को भी कई बार इस तरह के इनपुट मिले हैं।