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उपहार अग्निकांड : अंसल बंधुओं ने रची साक्ष्य नष्ट करने की साजिश

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नई दिल्ली। अदालत ने मामले में पीड़ितों की संस्था एसोसिएशन ऑफ उपहार विक्टिम्स ऑफ उपहार ट्रेजेडी (एवीयूटी) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा की उस दलील को माना की अंसल बंधुओं और हर स्वरूप पंवार ने मामले में सीबीआई द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों में से मुख्य साक्ष्यों को नष्ट करने की साजिश रची थी। पाहवा ने कोर्ट को बताया कि साक्ष्यों को चुनकर नष्ट किया गया है और कई साक्ष्य गायब कर दिए गए।
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अभियोजन ने दावा किया कि मुख्य केस में अंसल बंधुओं पर मुकदमा चला था और जो साक्ष्य नष्ट या गायब किए गए उनसे उपहार सिनेमा की प्रतिदिन के कामकाज में उनकी संलिप्तता साबित होती थी। अंसल बंधुओं ने मुख्य केस में यह बचाव लिया था कि सिनेमा हॉल के प्रतिदिन के कार्यों से उनका कोई लेना-देना नहीं था।
2002 में सामने आई थी छेड़छाड़
साक्ष्यों के छेड़छाड़ की बात पहली बार 20 जुलाई 2002 को पता चली थी। कोर्ट के पूर्व कर्मी दिनेश चंद शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच हुई थी। उसे पहले निलंबित किया गया था और 25 जून 2004 को बर्खास्त कर दिया गया था।
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अंसल ने दिलवाई थी 15 हजार की नौकरी
अभियोजन ने तर्क रखा कि नौकरी से बर्खास्तगी के बाद अंसल बंधुओं ने दिनेश चंद शर्मा को 15 हजार रुपये महीना की नौकरी दिलवाई थी। जब ये मामला दर्ज हुआ तो जिस कंपनी में शर्मा को नौकरी दिलवाई गई थी, उसके दस्तावेज से कंपनी के चेयरपर्सन अनूप सिंह ने छेड़छाड़ की थी।
कमजोर हुआ था आम आदमी का भरोसा
दिल्ली पुलिस ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि अंसल बंधुओं द्वारा साक्ष्यों से छेड़छाड़ किए जाने से न्याय व्यवस्था में आम आदमी का भरोसा और विश्वास कमजोर हुआ था। पुलिस ने कहा कि यह केस उस समय दिल्ली का सबसे संवेदनशील मामला था। ऐसे मामले में साक्ष्यों से छेड़छाड़ को हल्के में नहीं लिया जा सकता था।
साक्ष्यों में शामिल था बरामदगी का विवरण
केस के आरोपपत्र के अनुसार जिन दस्तावेज और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गई उनमें दिल्ली का वह मेमो भी था जिसमें केस में साक्ष्यों की बरामदगी का विवरण था। इसके अलावा सिनेमा हॉल के भीतर लगे ट्रांसफार्मर की मरम्मत के सिलसिले में दिल्ली अग्नि शमन सेवा के रिकार्ड, निदेशक मंडल की बैठक के मिनट्स और चार चेक शामिल थे।
आरोपपत्र में कहा गया कि दस्तावेज के छह सेट में से सुशील अंसल के दस्तखत वाला 50 लाख का सेल्फ चेक, एमडी की मीटिंग के मिनट्स से साबित हुआ था कि इस हादसे के समय सिनेमा हॉल की प्रतिदिन की कार्यवाही को अंसल बंधु ही चला रहे थे।
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