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भवानी से अब अंगद बना बंदर, स्मार्ट सेंचुरी बना दूसरा घर

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सेंचुरी संचालिका के पास बोतल से दूध पीता मुक्त कराया गया बंदर का बच्चा। - फोटो : Grnoida
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ग्रेटर नोएडा। अल्फा-2 सेक्टर के पास झोपड़ी निवासी परिवार से मुक्त कराए गए बंदर के बच्चे को दनकौर की स्मार्ट सेंचुरी में रखा गया है। वन अधिकारियों का कहना है कि उसे अभी जंगल के माहौल की जानकारी नहीं है। ऐसे में जान जोखिम रहेगा। इस कारण उसे कुछ माह सेंचुरी में रखने के बाद जंगल में छोड़ दिया जाएगा। वहीं, सेंचुरी संचालिका ने उसका ख्याल रखना शुरू कर दिया और वह उसे अब भवानी नहीं अंगद के नाम से पुकारने लगी हैं।
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बता दें कि बंदर के बच्चे को अल्फा-2 के पास रह रहा परिवार भवानी के नाम से पुकारता था। उसके दूसरे साथी का अब तक पता नहीं चल पाया है। वन विभाग ने दावा किया है कि जल्द दूसरे बच्चे का भी पता लगा लिया जाएगा। वन विभाग को रविवार शाम सूचना मिली थी कि अल्फा-2 सेक्टर में झोपड़ी में रहने वाले एक परिवार ने बंदर के दो बच्चों को बंधक बनाया है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन का मामला होने के कारण वन दरोगा राम अवतार चौधरी की टीम ने मौके पर पहुंचकर एक बच्चे को मुक्त करा दिया, लेकिन दूसरा बच्चा नहीं मिला। परिवार का कहना था कि एक मदारी बंदर के बच्चे से मारपीट कर रहा था। इस कारण उन्होंने 3000 रुपये देकर बच्चे को खरीद लिया था। बंदर के बच्चे को मुक्त कराने के बाद रोते हुए परिवार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
बोतल से दूध पीने के बाद कर रहा मटरगश्ती
सेंचुरी संचालिका कावेरी ने बताया कि बच्चा काफी छोटा है। वह बोतल से दूध पीता है और मटरगश्ती करता है। फिलहाल वह कमरे में अधिक समय बिता रहा है। उसे इंसानों के साथ रहने की आदत हो गई है। उसे अभी जंगल में छोड़ा जाता है तो जान का खतरा हो सकता है। जब बंदर फल आदि खाने लगेगा और पेड़ों पर कूदने लगेगा तो सूरजपुर वेटलैंड में छोड़ा जाएगा।
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