अधिकारियों के मुताबिक, नरेला जोन में घोघा में तीन एकड़ जमीन पर काम शुरू कर दिया गया है। वहीं नांगली और ओखला में भी निर्माण कार्य जारी है। घोंघो और नांगली में हर दिन करीब 200 टन जैविक कचरे को संपीड़ित कर बायो सीएनजी का उत्पादन किया जाएगा, जबकि ओखला का प्लांट दोनों से बड़ा होगा और यहां हर दिन 300 टन जैविक कचरे को संपीडित किया जाएगा। इससे डेयरी से निकलने वाले कचरे का उचित समाधान होगा और पैदा होने वाली प्राकृतिक गैस से वाहन चलाए जा सकेंगे व चूल्हा भी जलाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त इन प्लांट से बचा हुआ कचरा जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल होगा। अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक तीनों प्लांटों पर डाइजेस्टर लगाने का काम चल रहा है। निगम ने संयंत्र के लिए मशीनें खरीदने का ऑर्डर दे दिया है। जल्द ही मशीनें आने की उम्मीद है, इसके बाद काम और तेज गति से आगे बढ़ेगा।
एमसीडी के विशेष अधिकारी अश्वनी कुमार के मुताबिक, पहले हस्तसाल में ऐसा ही एक बायो सीएनजी प्लांट लगाने की योजना बनी थी। लेकिन स्थानीय लोगों का सहयोग नहीं मिलने से काम रोक दिया गया। बाद में हस्तसाल वाले प्लांट को घोघा स्थानांतरित किया गया है। प्लांट लगने वाले तीनों क्षेत्रों में डेयरियों की अधिकता के कारण इन्हें आसानी पर्याप्त मात्रा में गोबर मिल जाएगा। इसके एवज में निगम उनको पैसे का भुगतान करेगा।
जैविक कचरे से इस तरह बनती बायो सीएनजी
बायो सीएनजी प्लांट में सबसे पहले जैविक कचरे को गलाकर बायो-गैस बनाई जाती है। यदि इसमें हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा 1500 पार्ट्स पर मिलियन से अधिक होती है तो गैस में से सल्फर को अलग किया जाता है। इसके बाद गैस को सीएनजी के लिए उपयुक्त बनाने के लिए इसे अपग्रेड किया जाता है। बायो-सीएनजी में 92 से 98 फीसदी मीथेन व दो फीसदी कार्बन डाइआक्साइड होती है, जबकि बायो-गैस में 55 से 65 फीसदी मीथेन और 34 से 45 फीसदी कार्बन डाइआक्साइड। बायो-सीएनजी की कैलोरिफिक मात्रा 52 हजार किलोजूल होती है। यह बायो-गैस से करीब 167 फीसदी ज्यादा है। बायो-सीएनजी में मीथेन और कैलोरिफिक मात्रा अधिक व नमी कम होने से यह वाहनों के ईंधन के लिए उपयुक्त हो जाती है।
दिल्ली में हर दिन 11,000 मीट्रिक टन निकलता है कचरा
दिल्ली में हर दिन 11,000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। यह कचरा दिल्ली की तीन लैंडफिल साइटों पर जाता है। सूखा कचरा अभी भी लैंडफिल साइटों पर ही इकट्ठा हो रहा है, जबकि जैविक कचरे से खाद बनाने के लिए निगम ने कई प्लांट लगाए हैं। इसके अलावा तीन वेस्ट टु एनर्जी प्लांट भी जैविक कचरे के इस्तेमाल से ही चल रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी दिल्ली में बड़ी मात्रा में जैविक कचरा बचता है, जिसका इस्तेमाल बायो सीएनजी प्लांट पर हो जाएगा।
हर दिन 4,400 मीट्रिक टन जैविक कचरा निकलता है
दिल्ली में हर दिन करीब 4,400 मीट्रिक टन जैविक कचरा पैदा होता है, अभी तक इस कचरे को वेस्ट टू एनर्जी प्लांट और कंपोस्ट संयंत्रों पर इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन अब इस कचरे को बायो सीएनजी प्लांट पर इस्तेमाल किया जाएगा।