वासुदेव ने कहा कि रोबोट ने अपने उन्नत उपकरणों और 3-डी तकनीक के साथ ऊतकों को कम से कम चोट पहुंचाने के साथ बहुत सटीक सर्जरी की है। उन्होंने कहा कि वे प्रत्यारोपण प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरणों को अधिक सटीक और सुरक्षित रूप से करने में सक्षम थे, जिसके परिणामस्वरूप दाता के साथ-साथ प्राप्तकर्ता के लिए बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं। सर्जरी के बाद मां ठीक है और चलने फिरने में स्वस्थ महसूस कर रही हैं। दो दिन बाद वह पूरी तरह सामान्य हो गई थी। वहीं, बेटे के शरीर में किडनी के प्रत्योरोपित होने के बाद किडनी ने अपना काम करना शुरू कर दिया था। सर्जरी के चार दिन गुजरने के बाद किडनी अपना काम सामान्य रूप से कर रही है।
टीम में ये डॉक्टर रहे शामिल
प्रत्यारोपण सर्जरी टीम में डॉ. पवन वासुदेव, डॉ. नीरज कुमार और डॉ. संदीप कुमार शामिल थे। वहीं, एनेस्थेटिक टीम में डॉ कविता शर्मा, डॉ. रंजू गांधी और डॉ. भव्य कृष्ण शामिल रहे। इसके अलावा नेफ्रोलॉजी टीम में डॉ. राजेश कुमार, डॉ. पल्लवी प्रसाद और डॉ. साहिल अरोड़ा शामिल थे।
क्या होती है द विंची रोबोटिक सर्जरी
द विंची रोबोटिक सर्जरी एक उन्नत किस्म की सर्जरी होती है, जिसमें रोबोटिक मदद ली जाती है। डॉक्टर इससे जटिल सर्जरी को भी बहुत सटीकता से कर सकते हैं। इस सर्जरी में ऊतकों को कम से कम नुकसान पहुंचता है। इसकी सुरक्षा और प्रभाव को लेकर कई चिकित्सीय लेखों में शोध प्रकाशित हो चुके हैं। विश्वभर में विभिन्न अस्पतालों में 1700 से अधिक द विंची रोबोट सर्जरी तंत्र है। वहीं, साढ़े सात लाख से अधिक मरीज इस तकनीक से सर्जरी करवा चुके हैं।