तिहाड़ जेल में कैदियों की संख्या में लगातार बढ़ रही है। आलम यह है कि जेल में क्षमता से दो गुना कैदी बंद हैं। लेकिन इन अनुपात में जेल कर्मियों की संख्या में इजाफा नहीं हो रहा है। यहां तक कि जेल में स्वीकृत पद से भी कम संख्या में जेल कर्मी कार्यरत हैं। तिहाड़ जेल में ऐसे भी कैदी बंद हैं, जिनकी देखरेख काफी संवेदनशील मानी जाती है। जेल में आए दिन कैदियों के बीच आपसी झड़प और तनातनी की सूचना आती है। माना जा रहा है कि जेल कर्मियों की कमी की वजह से ऐसी स्थिति सामने आ रही है।
कैदियों व जेल कर्मियों की संख्या के बीच संतुलन बनाने को लेकर जेल अधिकारी स्पष्ट तौर पर कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि समय समय पर जेल कर्मियों की कमी और कैदियों की सुरक्षा के लिए अन्य एजेंसियों के जरिए इसकी पूर्ति की जा रही है। कर्मियों की कमी को लेकर भी विभागीय स्तर पर पहल की जा रही है। जेल में निचले पद पर कार्यरत कर्मियों की संख्या काफी कम है।
जेल के कामकाज को देखते हुए वार्डर और मेट्रन का पद काफी महत्वपूर्ण होता है। पुरुषों के जेल में वार्डर व महिलाओं के जेल में मेट्रन की तैनाती होती है। इनका कैदियों के साथ सीधा संपर्क होता है। कैदियों को बैरक से निकालना और बंद करने से लेकर उनकी सारी गतिविधियों की जानकारी इनको होती है। इसी तरह से जेल में तैनात वार्डर से ऊपर वाले पद हेड वार्डर व हेड मेट्रन के पदों पर भी काफी रिक्त हैं। ऐसा ही कुछ हाल सहायक अधीक्षक के पद पर भी है।
तिहाड़ में पदों की कमी
पद स्वीकृत पदों की संख्या रिक्त पद
- उप अधीक्षक 1 27 3
- उप अधीक्षक 2 49 5
- कल्याण अधिकारी 15 3
- काउंसलर 40 8
- सहायक अधीक्षक 312 88
- हेड वार्डर 416 55
- हेड मेट्रन 58 5
- वार्डर 1235 279
- मेट्रन 176 63