डब्ल्यूएफआई की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने अदालत को बताया कि मंत्रालय का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और भारत के राष्ट्रीय खेल विकास संहिता, 2011 का पूरी तरह से उल्लंघन है। मामले की अगली सुनवाई 28 मई को होगी।
उच्च न्यायालय ने मंगलवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) द्वारा अपने निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने केंद्र सरकार को याचिका पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 मई को होगी।
विज्ञापन
डब्ल्यूएफआई को 24 दिसंबर 2023 को जारी एक संचार के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा निलंबित कर दिया गया था। यह निलंबन संजय सिंह पूर्व डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के करीबी के डब्ल्यूएफआई चुनाव जीतने और शीर्ष कुश्ती निकाय का नियंत्रण लेने के कुछ ही दिनों बाद किया गया था।
खेल मंत्रालय ने डब्ल्यूएफआई द्वारा जल्दबाजी में लिए गए फैसलों का हवाला दिया था और कहा था कि नए नेतृत्व ने नियमों और विनियमों की पूरी तरह से उपेक्षा की है। इसके बाद इसने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) से डब्ल्यूएफआई के मामलों को नियंत्रित और प्रबंधित करने के लिए एक तदर्थ निकाय का गठन करने को कहा।
विज्ञापन
विशेष रूप से डब्ल्यूएफआई के मामलों के प्रबंधन के लिए गठित तदर्थ समिति को भी आईओए ने भंग कर दिया है। डब्ल्यूएफआई की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने अदालत को बताया कि मंत्रालय का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और भारत के राष्ट्रीय खेल विकास संहिता, 2011 का पूरी तरह से उल्लंघन है।
कृष्णन ने कहा कि डब्ल्यूएफआई को बिना किसी नोटिस के निलंबित कर दिया गया था, जबकि खेल संहिता खुद मानती है कि डब्ल्यूएफआई जैसे महासंघ को निलंबित करने का निर्णय लेने से पहले निकाय को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए।