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सीवर के शोधित पानी से बढ़ेगी अरावली की रंगत

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गुरुग्राम। अब सीवर के शोधित पानी से अरावली की रंगत बढ़ाई जाएगी। इसके लिए पूरा खाका तैयार कर काम शुरू कर दिया गया है। इस महीने के आखिरी तक अरावली में सीवर का शोधित पानी पहुंचा दिया जाएगा। वन विभाग की अनुशंसा पर जीएमडीए ने इस पर काम शुरू कर दिया है। प्रतिदिन तीन एमएलडी (30 लाख लीटर) पानी अरावली में पौधों की सिंचाई के लिए पहुंचाया जाएगा। इस योजना पर जीएमडीए पौने चार करोड़ रुपये खर्च करेगा।
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आठ एमएलडी पानी हो रहा शोधित
जीएमडीए की ओर से रोजाना आठ एमएलडी यानी 80 लाख लीटर पानी शोधित किया जा रहा है। इसमें से ढाई एमएलडी पानी रोजाना ताऊ देवी लाल तथा लेजर वैली पार्क में पेड़ पौधों को सींचने के लिए दिया जा रहा है। बेगमपुर खटोला तथा बहरामपुर स्थित टेक्सटाइल इंडस्ट्री को भी इसका कुछ हिस्सा दिया जा रहा है। बचे पानी को बादशाहपुर ड्रेन में बेकार छोड़ा जा रहा है। यह पानी बादशाहपुर ड्रेन के माध्यम से नजफगढ़ ड्रेन में जा रहा है।
वन्य जीवों को पीने के लिए मिलेगा पानी
जीएमडीए के चीफ इंजीनियर प्रदीप सिंह के दावे के मुताबिक शोधित पानी वन्य जीवों के पीने के भी काम आएगा। उन्होंने कहा कि इसमें बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) मात्र पांच मिलीग्राम प्रति लीटर है। जो हर लिहाज से उत्तम है। पानी के लिए अब वन्य जीवों को आबादी क्षेत्र में नहीं भटकना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि सर्दर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर) पर पुलिस चौकी तक जीएमडीए की ओर से सीवरेज के पानी की पाइप लाइन बिछी हुई है। 3.75 करोड़ रुपये की लागत से आगे की पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है।
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