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जलभराव हुआ तो नाले की सफाई के लिए खोदी सड़क

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गुरुग्राम। मानसून से पहले जलभराव को लेकर निगमायुक्त भले ही अधिकारियों के साथ बैठकें लेते रहे हों लेकिन सच्चाई यह है कि धरातल पर कोई काम नहीं किया गया। स्थिति यह है कि मानसून की बारिश शुरू होने के बाद अब सड़कों की खुदाई कर नालों की सफाई की जा रही है। शनिवार को बसई रोड पर कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जहां पटौदी चौक से पहले नाले की सफाई के लिए निगम कर्मियों ने सड़क का एक बड़ा हिस्सा खोद डाला।
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सफाई के बाद सड़क को वैसी ही छोड़कर निगम कर्मचारी नदारद हो गए, जिसके चलते राहगीरों को मुसीबत का सामना करना पड़ा। कायदे से तो मानसून से पहले ही ये सीवर सफाई का काम हो जाना चाहिए था लेकिन निगमायुक्त व अन्य निगम अधिकारी अपने कार्यालयों में बैठकें लेने के बड़े-बड़े दावे करने तक ही सीमित रह गए। स्थिति यह है कि अब बारिश के बाद जब जलनिकासी में समस्या हुई, तब निगम प्रशासन को नालों की सफाई की याद आई है।
अधिकारियों ने नहीं किया स्थलीय निरीक्षण
इसी क्रम में नालों के मेनहोल को खोलने के लिए अब सड़कों की खुदाई की जा रही है। उसमें भी हैरत की बात यह है कि सड़क को खुदी ही छोड़कर कर्मचारी नदारद हो रहे हैं और अधिकारियों को कोई परवाह ही नहीं है। सच्चाई तो यह है कि नगर निगम के उच्चाधिकारियों ने समय रहते स्थलीय निरीक्षण करने व नालों की सफाई की जमीनी हकीकत की पड़ताल करने की जहमत नहीं उठाई। नतीजा यह है कि अधिकांश नालों की सफाई न होने के कारण मानसून की पहली बारिश में ही शहर तालाब बन गया।
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वाहन चालकों को हुई दिक्कत, जाम भी लगा
जलभराव की यह स्थिति लगातार बनी हुई है। ऐेसे में लोगों का कहना है कि समय रहते यदि साफ-सफाई कराई जाती तो बारिश के मौसम में सड़क खोदने की नौबत नहीं आती। पटौदी चौक से ठीक पहले सड़क की खुदाई होने के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा तो वहीं सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण बीच-बीच में जाम भी लगा।
हादसे का बना रहता है डर
सिर्फ एक जगह ही नहीं पूरे पटौदी रोड की सड़क के बींचोबींच स्थित मेनहोल के ढक्कन अव्यवस्थित तरीके से पड़े हुए हैं, जिसके चलते हर समय राहगीरों को हादसे का डर रहता है। इसके अलावा पटेल नगर, अतुल कटारिया चौक रोड, सेक्टर-15 समेत विभिन्न इलाकों में या तो मेनहोल के ढक्कन खुले हैं या फिर नालों के स्लैब खुले पड़े हैं। इन अव्यवस्थाओं को देखने वाला कोई नहीं है और नगर निगम अधिकारियों का काम भी सारा कागजों पर ही चल रहा है।
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