गुरुग्राम (कुमार प्रवीण)। यह कहानी ऐसी सामान्य महिला की है जिसने महज आठवीं पास होकर अपनी खुद की मेहनत से लखपति बनने का सपना ही पूरा नहीं किया, बल्कि दूसरी महिलाओं को हौसला दिया और उनकी प्रेरणा बनकर उनके सपनों को पंख लगाने की भी सारथी बन रही हैं।
फर्रुखनगर खंड के गांव ताजनगर की पूनम शर्मा ने आईटी और मेडिकल हब के रूप में अपनी पहचान कायम कर चुके गुरुग्राम को खास लड्डुओं के जरिये अलग पहचान दिलाई है। आज पूनम और उसके हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चल रहे समूह ‘पहल’ की महिला सदस्यों की ओर से बनाए जा रहे लड्डू विदेशों भी अपना जायका बिखेर रहे हैं। यहां हाथ से निर्मित 35 प्रकार के औषधीय लड्डुओं की विदेशों में खास मांग है। इन लड्डुओं की मांग का ही परिणाम है कि एक छोटे से गांव के सामान्य परिवार की बहु पूनम शर्मा को शून्य से शिखर पर पहुंचा दिया है। पूनम शर्मा का सालाना टर्न ओवर 20 लाख रुपये के पार पहुंच गया है।
100 रुपये से शुरू किया था थाली सप्लाई का काम
बकौल पूनम साल 2016 में सोनीपत से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी इंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (निफ्टम) की टीम गांव में दौरे पर आई तो उन्होंने कुछ महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने की प्रेरणा देकर पांच दिन का प्रशिक्षण भी दिया। महज पांच दिन के प्रशिक्षण के बाद पूनम ने 100 रुपये से थाली सप्लाई का काम शुरू किया। 100 रुपये से उसने बाजार से सब्जियां खरीदी, बाकी सामान घर से इस्तेमाल किया और व्यवसाय के क्षेत्र में शुरुआत कर दी। इससे जो बचत होती उसे भी व्यवसाय में लगाने लगी। देखते ही देखते उनका थाली का व्यवसाय चल निकला। मुंबई के टिफिन सर्विस की तर्ज पर पूनम ताजनगर, जमालपुर और क्षेत्र के दूसरे वेयरहाउस में काम करने वाले लोगों को थाली सप्लाई करने लगीं। आय बढ़ी तो उसने दूसरी महिलाओं को अपने साथ जोड़ा। बाद में व्यवसाय को बढ़ाने की गरज से पूनम और समूह की दूसरी महिलाओं ने रूडसेट संस्थान से ट्रेनिंग ली और खाद्य पदार्थ बनाने के व्यवसाय में उतर गई। शुरुआत में समूह ने परंपरागत तौर पर पापड़, अचार, मुरब्बा बनाना शुरू किया। बाद में लड्डुओं का व्यवसाय शुरू कर दिया। पहले गोंद, बेसन, तिल, बाजरे के लड्डू बनाए। मांग बढ़ती गई तो पूनम ने लड्डुओं की किस्में भी बढ़ा दीं। वह धीरे धीरे औषधिय लड्डुओं के व्यवसाय में उतर गई। आज पूनम और उसका समूह 35 प्रकार के लड्डू बनाता है, जिसकी विदेशों में खासी मांग है।
इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में स्टॉल लगाया
लड्डुओं का व्यवसाय शुरू करने के बाद पूनम इन्हें सबसे पहले साल 2018 में सूरजकुंड मेले में लेकर पहुंची। यहां उनके लड्डुओं को खूब पसंद किया गया। प्रणब मुखर्जी फाउंडेशन से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हें दूसरे शहरों से मांग आने लगी। गुरुग्राम के गीता महोत्सव के अलावा उसने दिल्ली के प्रगति मैदान के इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में लड्डुओं का स्टॉल लगाया। यहां विदेशी लोगों ने खूब खरीदारी की। यहां अनेक संस्थाओं की ओर से पूनम को लड्डुओं के ऑर्डर मिलने लगे और उनका व्यवसाय चमक उठा। आज उनके लड्डू प्रणब मुखर्जी फाउंडेशन, इजहार कॉरिडोर और अपनी खेती संस्थाओं के जरिये विदेशों तक पहुंच रहा है।
आयुष विभाग में खास मांग
औषधिय होने के कारण पूनम के लड्डुओं की आयुष विभाग में खासी मांग है। पूनम बताती है कि आयुष विभाग दवा के तौर पर इन लड्डुओं को विभिन्न बीमारियों के मरीजों को देता है। कुछ आयुर्वेद और योग की संस्थाएं भी उनसे लड्डू लेती हैं।
ट्रंप ने भी चखा स्वाद
पूनम बताती हैं कि 24 फरवरी 2020 को अहमदाबाद में आयोजित नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम में विशेष तौर पर उनके लड्डू मंगवाए गए थे। कुछ खास किस्म के लड्डुओं को वहां पहुंचाया गया, जिन्हें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित दूसरे मेहमानों को गिफ्ट के तौर पर दिया गया।
ये हैं लड्डुओं की किस्में
बाजरा लड्डू, धनिया, गोंद, कमरकस, बेसन, आंवला, एलोवेरा, हल्दी, सौंठ, अजवायन, गुड़-तिल, अलसी, रागी, चिया सीड्स, मेथी, सुपर लड्डू, कांगनी लड्डू, सफेद मिर्ची लड्डू, नारियल, चॉकलेट, नारियल-पनीर लड्डू, काला तिल, काजू ड्राई फ्रूट, अंजीर ड्राई फ्रूट, तिल खोया, ड्राई फ्रूट, उड़द लड्डू, क्रंची लड्डू, बादाम, खजूर, मूंग लड्डू, ड्राई फ्रूट पंजीरी, चना लड्डू, मिल्क केक विद कोकोनट और पिस्ता लड्डू।